वंदना राजपूत बोलीं—नई दरों से आम यात्रियों का बढ़ेगा खर्च, सरकार किराया वृद्धि के प्रभाव का आकलन करे
रायपुर। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों के किराये में बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने नई दरों पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से किराया वृद्धि की समीक्षा करने और आम यात्रियों पर पडऩे वाले आर्थिक बोझ का आकलन सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि किराये में बढ़ोतरी से नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, मजदूरों और रोजाना बसों से सफर करने वाले यात्रियों का बजट प्रभावित हो सकता है।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि राज्य में एक साल के भीतर दो बार किराया बढ़ाया गया है और कुल वृद्धि लगभग 75 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने साधारण बसों के किराये में हालिया बढ़ोतरी को आम जनता के लिए परेशानी बढ़ाने वाला फैसला बताया।
प्रति किलोमीटर किराये में 50 पैसे की वृद्धि-
वंदना राजपूत के अनुसार, परिवहन विभाग की नई दरों के तहत साधारण बसों का किराया 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर किया गया है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर 50 पैसे की वृद्धि हुई है, जो पुरानी दर के मुकाबले करीब 40 प्रतिशत है। कांग्रेस का कहना है कि इस बढ़ोतरी का असर उन लोगों पर अधिक पड़ सकता है, जो कामकाज, पढ़ाई, इलाज और व्यापार के सिलसिले में नियमित रूप से बसों से यात्रा करते हैं। किराये में वृद्धि के कारण यात्रियों के मासिक खर्च में इजाफा होने की आशंका है।
महंगाई के बीच यात्रियों के बजट पर असर-
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच बस किराये में बढ़ोतरी से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि रोजाना काम पर जाने वाले मजदूरों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के अतिरिक्त यात्रा खर्च को लेकर सरकार ने क्या आकलन किया है।
उन्होंने त्योहारों के दौरान किराया बढऩे से यात्रियों की परेशानी बढऩे की बात भी कही। कांग्रेस का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े फैसले लेते समय आम यात्रियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
किराया वृद्धि की समीक्षा की मांग-
कांग्रेस ने राज्य सरकार से नई दरों की समीक्षा करने और किराया बढऩे से यात्रियों पर पडऩे वाले प्रभाव की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने किराया वृद्धि वापस लेने पर विचार करने का भी आग्रह किया है। वहीं, बस संचालन से जुड़ी लागत और बस संचालकों की समस्याओं को भी परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है। ऐसे में किराये को लेकर अंतिम निर्णय करते समय यात्रियों की आर्थिक क्षमता और बस संचालन की व्यावहारिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।
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अब इस मुद्दे पर सरकार के रुख और किराया वृद्धि की समीक्षा को लेकर होने वाले निर्णय पर नजर रहेगी। यात्रियों को राहत देने के साथ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना इस मामले में प्रमुख चुनौती है।
