नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे व विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर जारी घमासान के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया उबाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शनिवार, 17 अक्टूबर को राज्य में फिर से नए सिरे से SIR प्रक्रिया कराने की जोरदार मांग उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन में पिछली प्रक्रिया के दौरान व्यापक स्तर पर हिंसा, तोड़फोड़ और सरकारी दस्तावेजों को आग लगाने की घटनाएं हुई थीं, जिसके चलते लाखों घुसपैठियों व फर्जी वोटरों के नाम सूची से बाहर नहीं हो सके।
टीएमसी ने हिंसा से प्रक्रिया बाधित की, न्यायिक अधिकारियों को भी बनाया था बंधक
‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने खुलेआम गुंडागर्दी कर सत्यापन कार्य में गंभीर बाधाएं खड़ी की थीं। उन्होंने कहा कि बीजेपी के बूथ-स्तरीय प्रतिनिधियों (BLAs) के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और मतदाताओं के वैध दस्तावेजों को जबरन छीनकर आग के हवाले कर दिया गया। मालदा के मोथाबाड़ी का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि वहां उग्र प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों तक को बंधक बना लिया था। इसके अलावा बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पॉल पर भी जानलेवा हमला कर उनके हाथ से जरूरी कागजात छीनकर जलाए गए थे। भट्टाचार्य ने कहा कि अगर उस समय बिना डर और हिंसा के निष्पक्ष प्रक्रिया पूरी हुई होती, तो लाखों और अवैध व फर्जी वोटरों के नाम मतदाता सूची से बाहर होते।
27 लाख नाम हटाए गए, 22 लाख मतदाताओं की अपीलें अब भी ट्रिब्यूनल में लंबित
पश्चिम बंगाल में पिछली SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 27 लाख संदिग्ध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। निर्वाचन आयोग ने सितंबर माह में सुप्रीम कोर्ट को आधिकारिक तौर पर अवगत कराया था कि 22 लाख से अधिक मतदाताओं की अपीलें वर्तमान में विभिन्न ट्रिब्यूनलों के समक्ष विचाराधीन हैं। उल्लेखनीय है कि नंदीग्राम और रेजीनगर में हाल ही में संपन्न हुए उपचुनावों के दौरान जिन लोगों की अर्जियां ट्रिब्यूनल में लंबित थीं, उन्हें मतदान करने की अनुमति नहीं दी गई थी। बीजेपी नेतृत्व का कहना है कि SIR प्रक्रिया का एकमात्र और पारदर्शी उद्देश्य बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के अवैध नामों को मतदाता सूची से हटाकर भारतीय लोकतंत्र को सुरक्षित रखना है।
CEC ज्ञानेश कुमार को बताया बंगाल का ‘हीरो’, विपक्ष पर साधा तीखा निशाना
विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पर कड़ा पलटवार करते हुए समिक भट्टाचार्य ने उनका खुलकर बचाव किया और उनकी कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अभूतपूर्व हिंसा, विरोध और धमकियों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य को बिना किसी बड़ी चुनावी हिंसा के निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव का उपहार दिया है। इसी कारण बंगाल की शांतिप्रिय जनता उन्हें एक सच्चे ‘हीरो’ के रूप में देखती है। दिल्ली में विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर तंज कसते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जिन नेताओं का बंगाल की जमीन से जनाधार पूरी तरह खत्म हो चुका है, वे अब दिल्ली जाकर ऐसी ताकतों के साथ हाथ मिला रहे हैं जिनका लोकतंत्र से कोई सरोकार नहीं है।
