50 हजार रुपये का मुचलका भरने और एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त; कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च से पहले पुलिस ने लिया था हिरासत में
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को अदालत ने सशर्त जमानत दे दी है। उन्हें दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को दिपके को मंदिर मार्ग पुलिस थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें कुछ शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया गया।
‘लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने दिपके को 50 हजार रुपये का मुचलका भरने और पहले जारी किए गए शांति संबंधी बंधपत्र की शर्तों का पालन करने को कहा है। इसके तहत उन्हें एक वर्ष तक शांति बनाए रखने और निर्धारित शर्तों का पालन करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
पिछले करीब एक सप्ताह के दौरान अभिजीत दिपके को दो बार गिरफ्तार किया जा चुका है। शुक्रवार को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस उनके घर पहुंची थी। पुलिस ने उन्हें दो नोटिस दिए और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन के लिए जाने से मना किया था। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित धारा 163 का हवाला देते हुए किसी भी तरह का प्रदर्शन नहीं करने की हिदायत दी थी। साथ ही, निर्देशों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
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हालांकि, दिपके प्रदर्शन में शामिल होने की अपनी योजना पर कायम रहे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और फिर गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें निर्धारित शर्तों के साथ जमानत मिली।
इससे पहले 10 अक्टूबर को अभिजीत दिपके के साथ कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष दास और सौरव रंका को भी हिरासत में लिया गया था। तीनों को दिल्ली छावनी थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत के सामने पेश किया गया था। उस समय 50 हजार रुपये का मुचलका भरने और एक वर्ष तक शांति तथा अच्छा आचरण बनाए रखने का वचन देने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था।
इसके बावजूद प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले दिपके को दोबारा हिरासत में लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद उनकी गिरफ्तारी और प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।
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इधर, दिल्ली के रायसीना रोड पर वामपंथी दलों ने भी प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। वहीं, अखिल भारतीय महिला सांस्कृतिक संगठन, क्रांतिकारी युवा संगठन और अन्य संगठनों ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई के विरोध में मार्च निकाला।
इस बीच कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि यह रैली मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर आयोजित की जाएगी। दिल्ली में लगातार हो रहे प्रदर्शनों और प्रस्तावित राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है।
