दिल्ली में वायु गुणवत्ता सुधरकर संतोषजनक स्तर पर पहुंची, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में फसलों को नुकसान की आशंका; पहाड़ों पर शुरुआती बर्फबारी
नई दिल्ली। उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में सप्ताह की शुरुआत में हुई बेमौसम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं के बाद मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, वहीं पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, मौसम प्रणाली कमजोर पडऩे के साथ ही दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई मैदानी इलाकों में मौसम फिर से शुष्क होने लगा है। बारिश से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जबकि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शुरुआती बर्फबारी से सर्दी का अहसास बढ़ गया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हाल की बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आई है। अक्टूबर में ही लोगों को हल्की ठंडक महसूस होने लगी है। बारिश से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों में कमी आने के कारण दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 91 दर्ज किया गया, जो निर्धारित वर्गीकरण के अनुसार संतोषजनक श्रेणी में आता है।
हालांकि, मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वायु गुणवत्ता में यह सुधार अस्थायी हो सकता है। बारिश थमने और हवा की गति कम होने पर प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ सकता है। केवल बारिश के भरोसे लंबे समय तक प्रदूषण को नियंत्रित नहीं रखा जा सकता।
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कमजोर पडऩे से दिल्ली में आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। 19 से 21 अक्टूबर के बीच आसमान साफ रहने और धूप निकलने से दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम साफ होने से त्योहारों की तैयारियों और सप्ताहांत में बाहर निकलने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और सहारनपुर सहित कई जिलों में सप्ताह की शुरुआत में तेज आंधी और बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में सतही हवाओं की गति 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। तेज हवाओं और बारिश के कारण सड़क यातायात बाधित हुआ, जबकि कृषि क्षेत्र को भी नुकसान की आशंका है।
धान और गन्ने जैसी खरीफ की फसलें पककर तैयार होने के समय बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिन किसानों की फसलें खेतों में कटाई के लिए तैयार थीं या जिनकी कटाई हो चुकी थी, उन्हें फसल भीगने और खराब होने का खतरा है।
मौसम साफ होने के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां कम होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर सुबह हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें और कटाई तथा भंडारण से पहले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान एवं सरकारी सलाह पर ध्यान दें।
राजस्थान के कई हिस्सों में भी बेमौसम बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि दर्ज की गई। श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण दिन के तापमान में पांच डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई। अक्टूबर में खरीफ की फसलें पककर तैयार होने के दौरान बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ओलों से फसलों के दाने झडऩे और गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है। नुकसान की मात्रा ओलों के आकार और फसल की स्थिति पर निर्भर करती है।
मौसम साफ होने के बाद कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं। किसानों को फसलों को सुरक्षित रखने और आगे की कृषि गतिविधियों के लिए प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं पर नजर रखने की सलाह दी गई है। उत्तर भारत में मौसम में आए बदलाव का प्रमुख कारण पश्चिमी विक्षोभ रहा। इसका असर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में देखने को मिला। ऊंचाई वाले इलाकों में इस मौसम की शुरुआती बर्फबारी हुई, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई। इसके बाद तापमान में गिरावट आने से पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ गई है।
मौसम प्रणाली कमजोर पडऩे के साथ शिमला, मनाली, गुलमर्ग और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों पर आसमान साफ होने की उम्मीद है। पहाड़ों पर बर्फबारी के बाद पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। हालांकि, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से पहले मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों और मार्गों की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां कम होने के बीच दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में बारिश की संभावना बनी हुई है। पूर्वोत्तर मानसून तमिलनाडु और दक्षिण-पूर्वी भारत के आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। सामान्य तौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच यह इन इलाकों में अच्छी बारिश लाता है।
तटीय तमिलनाडु, केरल के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में नमी से भरी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से बारिश हो सकती है। बारिश की तीव्रता और उसका क्षेत्र इन प्रणालियों की दिशा तथा वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
बारिश से कृषि गतिविधियों को लाभ मिल सकता है और जलाशयों सहित अन्य जल संसाधनों में पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। हालांकि, अत्यधिक बारिश होने पर जलभराव, यातायात बाधित होने और निचले या संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा भी रहेगा। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई और पूर्वोत्तर मानसून की सक्रियता के बीच का समय देश के वर्षा चक्र के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस दौरान उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश कम होने लगती है, जबकि दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
फिलहाल उत्तर भारत में मौसम के धीरे-धीरे स्थिर और शुष्क होने की संभावना है। वहीं, दक्षिण भारत में बारिश की स्थिति पर मौसम प्रणालियों की गतिविधियों का असर बना रहेगा। ऐसे में किसानों, यात्रियों और आम नागरिकों के लिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान तथा विभागीय सलाह पर ध्यान देना जरूरी है।
