चंडीगढ़। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपियन परगट सिंह अब पंजाब कांग्रेस की कप्तानी संभालेंगे। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह ली है। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुए इस नेतृत्व परिवर्तन के जरिये कांग्रेस ने पंजाब के दोआबा क्षेत्र को प्रदेश संगठन की कमान सौंपी है।
परगट के सामने ये चुनौती
नए अध्यक्ष बनने के बाद परगट सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के भीतर पिछले कई महीनों से चल रही खींचतान को खत्म कर संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की होगी। राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर बने मतभेदों के बीच हाईकमान ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाने के बाद संगठन की स्थिति पर फीडबैक लिया था। इसके बाद वड़िंग ने प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। ऐसे में परगट की नियुक्ति को संगठन में अलग-अलग धड़ों के बीच संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मालवा-माझा में भी साधना होगा संतुलन
परगट सिंह जालंधर कैंट से विधायक हैं और दोआबा क्षेत्र से आते हैं। वड़िंग के बाद प्रदेशाध्यक्ष के लिए मालवा से विजयइंदर सिंगला, दोआबा से परगट सिंह और माझा से सुखजिंदर सिंह सरकारिया के नामों का पैनल हाईकमान के सामने था। ऐसे में कांग्रेस ने तीनों क्षेत्रों में संतुलन की चर्चा के बीच दोआबा के चेहरे पर भरोसा जताया है। पार्टी के सामने अब परगट की अगुवाई में सभी वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की चुनौती होगी। 2027 के चुनाव में कांग्रेस को आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करनी है।
हॉकी के मैदान से सियासत की पिच तक
परगट सिंह ने खेल से राजनीति का सफर शुरू किया। वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे और ओलंपियन हैं। राजनीति में उनकी एंट्री 2012 में शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर जालंधर कैंट से विधानसभा चुनाव जीतकर हुई। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और जालंधर कैंट से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए। 2022 में भी उन्होंने यह सीट बरकरार रखी। 2021 में नवजोत सिंह सिद्धू के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद परगट सिंह को पीपीसीसी में महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी मिली थी। बाद में चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में उन्हें खेल और शिक्षा मंत्री बनाया गया था।

