*आईसीएमआर ने कहा-सामान्य फ्लू जैसे लक्षण*
नई दिल्ली। भारत में एच1एन1 संक्रमण के मामलों में पिछले वर्षों की तुलना में छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही डेंगू और मलेरिया जैसी अन्य मौसमी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं। संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने, जरूरत पडऩे पर मास्क पहनने और स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय देशभर में प्रयोगशालाओं के माध्यम से एच1एन1 समेत मौसमी बीमारियों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल संक्रमण के प्रसार और इसके स्वरूप की निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी असामान्य बढ़ोतरी का समय रहते पता लगाया जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में फैल रहा एच1एन1 का स्वरूप पिछले वर्ष की तुलना में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा रहा है। विभाग के स्वास्थ्य अनुसंधान सचिव और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक राजीव बहल ने बताया कि आमतौर पर स्वस्थ लोगों में इसका संक्रमण हल्का रहता है और ज्यादातर मरीज सामान्य मौसमी फ्लू जैसे लक्षणों के साथ ठीक हो जाते हैं।
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हालांकि, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों को लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतने और आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एच1एन1 के अधिकांश मामले सामान्य मौसमी फ्लू की तरह ही दिखाई देते हैं। इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए सामान्य सावधानियां काफी प्रभावी साबित हो सकती हैं।
लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अनावश्यक जाने से बचने, सार्वजनिक स्थानों पर आवश्यकता के अनुसार मास्क पहनने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने और बीमार होने पर पर्याप्त आराम करने की सलाह दी जा रही है। एच1एन1 के साथ-साथ डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के मामलों में भी वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है। इन बीमारियों का प्रसार मुख्य रूप से मौसम और मच्छरों की संख्या बढऩे से जुड़ा होता है। ऐसे में घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना तथा मच्छरों से बचाव के उपाय करना जरूरी है।
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स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे किसी भी बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। खासकर तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या लगातार बिगड़ती तबीयत की स्थिति में चिकित्सकीय सहायता लेने में देरी न करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सतर्कता, स्वच्छता और समय पर उपचार सबसे महत्वपूर्ण बचाव उपाय हैं।
