नई दिल्ली। यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA) की समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट की वेबसाइटों पर सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है, ताकि न्यायिक अधिकारियों को संवेदनशीलता और कानूनी पहलुओं की बेहतर समझ मिल सके। यह कदम इलाहाबाद हाई कोर्ट के मार्च 2025 के एक विवादित आदेश के बाद उठाया गया था, जिसमें यौन उत्पीड़न के कुछ कृत्यों को रेप की कोशिश की श्रेणी में नहीं माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उस आदेश पर रोक लगाते हुए न्यायिक अधिकारियों के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा था।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने पटना हाई कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि, कुछ परिस्थितियों में केवल शारीरिक कृत्य के आधार पर रेप के प्रयास का अपराध साबित नहीं होता। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि, न्यायाधीशों को कानून में हो रहे बदलावों और महत्वपूर्ण फैसलों का लगातार अध्ययन करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों को न्यायिक हैंडबुक के दिशा-निर्देशों का पालन करने और पुलिस को भी एफआईआर व चार्जशीट तैयार करते समय इन बातों का ध्यान रखने को कहा है। मामला 2008 के एक कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है, जिसमें निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया था, जबकि हाई कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर रेप के प्रयास की धारा हटाकर महिला की गरिमा भंग करने से जुड़ी धारा में दोष माना था।
