वाशिंगटन/ तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद अब शांति समझौते पर सहमति बनने की खबर सामने आई है। इस प्रस्तावित डील को 14 अहम शर्तों के साथ तैयार किया गया है, जिसे वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के तहत ईरान पर लगे तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट प्रतिबंध हटाए जाएंगे, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर के फंड को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर की आर्थिक मदद का प्रस्ताव भी रखा गया है। सबसे बड़ा बदलाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा दबाव कम होने की उम्मीद है। अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और क्षेत्र से सैन्य मौजूदगी कम करने पर भी सहमति बनी है।

समझौते के अनुसार ईरान परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता दोहराएगा, जबकि अमेरिका इस दौरान नए प्रतिबंध न लगाने का वादा करेगा। इसके अलावा 60 दिनों की बातचीत अवधि के दौरान अंतिम शर्तों को तय करने की प्रक्रिया चलेगी। इस ऐतिहासिक समझौते पर 19 जून को जिनेवा में हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिसमें दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। अगर यह डील फाइनल होती है तो वैश्विक तेल बाजार, भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा।
