जोरहाट। असम के जोरहाट एयरबेस (रौरिया एयरफोर्स स्टेशन) पर भारतीय वायु सेना (IAF) का एक प्रमुख परिवहन विमान AN-32 भीषण हादसे का शिकार हो गया। नियमित उड़ान के बाद लैंडिंग के समय विमान पक्की एयरस्ट्रिप से चूक गया और उबड़-खाबड़ घास वाले हिस्से में उतर गया। इस जोरदार टक्कर के कारण विमान बीच से टूटकर दो हिस्सों में बंट गया और उसमें भयानक धमाके के साथ आग लग गई। एयरबेस की इमरजेंसी टीमों और फायर ब्रिगेड ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने पर हुए हादसे के बाद विमान में सवार क्रू मेंबर्स की स्थिति को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है और वायुसेना ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
सोवियत संघ द्वारा निर्मित AN-32 विमान 6.7 टन पेलोड या 40 से अधिक सैनिकों को ले जाने की क्षमता के कारण दुर्गम इलाकों में भारतीय सेना की रीढ़ माना जाता है, लेकिन इसके साथ हादसों का एक लंबा इतिहास जुड़ा है। साल 1986 से लेकर अब तक यह विमान भारत में करीब 22 बार क्रैश हो चुका है, जिसमें पिछली दुर्घटना साल 2025 में हुई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि जोरहाट एयरबेस से जुड़े विमानों के साथ इस साल का यह दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले मार्च महीने में ही जोरहाट से उड़ान भरने वाला एक सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान कार्बी आंगलोंग में क्रैश हो गया था, जिसमें देश ने अपने दो जांबाज अधिकारियों को खो दिया था। इस ताजा घटना ने सैन्य विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
