इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षाबलों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे स्थानीय कश्मीरियों पर सुरक्षाबलों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिसमें 27 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है और 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस नरसंहार के बाद पूरे पीओके में भारी आक्रोश है और आज पूर्ण बंद का आह्वान किया गया है। हालात को दबाने के लिए सरकार ने इंटरनेट पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और क्षेत्र में 14 हजार अतिरिक्त सैनिकों की फौज तैनात की जा रही है।

यह विवाद तब और भड़क गया जब पुलिस फायरिंग में मारे गए स्थानीय कारोबारी शाहजेब हबीब के शव का पोस्टमार्टम समय पर न होने से नाराज लोग अस्पताल में ही धरने पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे, जिसके बाद गुस्साई भीड़ और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। बाद में जब लोग मृत कारोबारी के जनाजे की नमाज के लिए इकट्ठा हुए, तब पाकिस्तानी सेना ने उन पर सीधी फायरिंग झोंक दी।

स्थानीय संगठन ‘जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के नेतृत्व में लोग काफी समय से महंगाई, बदहाली और विधानसभा की 12 रिफ्यूजी सीटों को बर्खास्त करने जैसी 38 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार बाहरी लोगों को बसाकर स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर करना चाहती है। शहबाज शरीफ सरकार ने इस जन आंदोलन को कुचलने के लिए JAAC को आतंकी संगठन घोषित कर इसके दफ्तरों को सील कर दिया है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी सरकार के इस तानाशाही कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है।
