झुंझुनूं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के इंडाली गांव से एक ऐसा कलेजा चीर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर आंख को नम कर दिया। भारतीय सेना की 11 ग्रेनेडियर्स यूनिट में तैनात 29 वर्षीय जांबाज जवान सुनील कुमार अपने घर आए तो थे खुशियां मनाने, लेकिन वे खुद हमेशा के लिए सो गए।
महज 17 दिन पहले ही सुनील के घर में दूसरे बेटे की किलकारी गूंजी थी। इसी दोहरी खुशी और बच्चे के नामकरण संस्कार (दशोठण) के उत्सव में शामिल होने के लिए सुनील छुट्टी लेकर गांव आए थे। पूरा परिवार मंगल गीतों और जश्न की तैयारियों में डूबा था कि तभी किस्मत ने क्रूर करवट ली। 29 मई की शाम एक बाइक हादसे में सुनील के सिर पर गंभीर चोट लग गई। जयपुर के मिलिट्री हॉस्पिटल में इलाज के दौरान इस जांबाज ने दम तोड़ दिया।
सोमवार को जब सुनील का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव पहुंचा, तो कोहराम मच गया। इससे पहले सम्मान में 14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों युवाओं ने ‘सुनील कुमार अमर रहे’ के नारे लगाए।
सबसे मार्मिक मंजर तब देखने को मिला जब गोद में 17 दिन के नवजात को थामे पत्नी रिंकू देवी पति के शव को देख बेसुध हो गईं। सेना के जवानों ने जब सुनील के 3 साल के मासूम बेटे युवराज को तिरंगा सौंपा और उसने अपने अबोध हाथों से पिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद सख्त सैन्य अधिकारियों और ग्रामीणों का कलेजा भी मुंह को आ गया।
