पहले नीट यूजी का पर्चा लीक हुआ, फिर वहां जांच का नाटक किया जा रहा है। कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं, लेकिन उनकी जो इस श्रृंखला के बहुत छोटे किरदार हैं। अब सीबीएसई में कापियां बदले जाने का मामला सामने आ गया। स्वयं सीबीआई ने अपनी गलती मानी है। लेकिन उसकी गलती मानने से क्या उन बच्चों को न्याय मिल पाएगा, जिनकी कापियां बदल कर उन्हें नंबर दिए गए। कहीं यह चूक के बजाय गहरी साजिश तो नहीं, जो पर्चा लीक की तरह ही सीबीएसई में भी नंबरों का धंधा करने वाली गैंग के द्वारा की गई हो? कुछ भी हो सकता है, असल में जब शिक्षा को सेवा की जगह कारोबार बना दिया जाता है, तब गलतियां सुधारी नहीं जातीं बल्कि बढ़ती जाती हैं। इसकी सबसे बड़ी कीमत बच्चों को अपने समय, आत्मविश्वास और भविष्य के रूप में चुकानी पड़ रही है। और ऊपर बैठे लोग केवल और केवल बकवास करके गलतियां छिपाने और असली अपराधियों को बचाने में लगे रहते हैं। असल में सीबीएसई द्वारा डिजिटल स्कैन कॉपी पाने के लिए 100 प्रति विषय, री-टोटलिंग के लिए 100 प्रति पेपर और री-इवैल्यूएशन के लिए 25 प्रति सवाल शुल्क वसूले जाते हैं। अपनी ही आंसर सीट की सही जांच के लिए एक छात्र को 2000 तक खर्च करने पड़ सकते हैं। जब करीब चार लाख छात्रों ने ऐसे आवेदन दिए हैं। पहली बात तो यह कि यह भी एक सरकारी संस्था का बड़ी कमाई का माध्यम बन गया है। लेकिन दूसरी गंभीर बात ये है कि कैसे किसी बच्चे की उत्तर पुस्तिका में ऊपरी पन्ना उसका और अंदर के पन्ने किसी और के आ गए? यानि जिस पेज पर रोल नंबर लिखा होता है, उसे छोडकऱ बाकी पन्ने बदले गए। जब बच्चों ने सोशल मीडिया पर इस गलती को उजागर किया, तो बवाल मच गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बच्चों को बुलाकर उनसे बात की। यूं तो प्रधानमंत्री ने भी मन की बात की, लेकिन उसमें न तो नीट के पर्चा लीक का मुद्दा था और न ही सीबीएसई की कापी बदले जाने का मामला। कहीं न कहीं लिखने वाले की गलती हो गई होगी। खैर, जब सीबीएसई की स्कैन की हुई उत्तर पुस्तिका का मामला बढ़ता दिखा, तो सीबीएसई ने पोर्टल में सिक्योरिटी की बड़ी चूक की गलती मान ली है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने लाखों छात्रों की आंसरशीट्स के सार्वजनिक होने और पोर्टल की सुरक्षा में चूक को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी कर दिया। यह बयान 12वीं क्लास के दो छात्रों के सीबीएसई क्लाउड स्टोरेज मैनेजमेंट पर बेहद गंभीर सवाल उठाने के बाद आया है। निसर्ग अधिकारी और सार्थक सिद्धांत, 12वीं क्लास के दो छात्रों ने सीबीसएई बोर्ड पर लाखों छात्रों की आंसरशीट्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। निसर्ग का दावा है कि सीबीएसई ने अपने अमेजन वेब सर्विसेज क्लाउड स्टोरेज बकेट को ठीक से सिक्योर नहीं किया है। बिना किसी ऑथेंटिकेशन के डेटा एक्सेस किया जा सकता है। सीबएसई ने अब सार्वजनिक रूप से मान लिया है कि उनके सर्विस प्रोवाइडर के पोर्टल में सिक्योरिटी की खामियां थीं, जिनकी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है। बोर्ड ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर लिखा, हम अपने सर्विस प्रोवाइडर के पोर्टल में मौजूद उन कमजोरियों पर करीब से नजर रख रहे हैं, जिनके बारे में पब्लिक डोमेन में बताया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में, सरकार के अलग-अलग विभागों और आईआईटी से साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की एक एक्सपर्ट टीम को इन सिस्टम्स को मजबूत बनाने के लिए लगाया गया है। इसमें इन सिस्टम्स को ज्यादा सेफ सेटअप पर ले जाना भी शामिल है। जिन कमजोरियों की पहचान की गई थी, उन्हें ठीक कर दिया गया है, और दूसरी ऐसी कमजोरियों की भी जांच की जा रही है जिनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि सीबीएसई ने उन लोगों का आभार जताया है जिन्होंने पोर्टल की खामियों को ढूंढा है। वैसे, सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर कई प्रकार की समस्याएं देखने को मिल रही हैं। पोर्टल पर किसी स्टूडेंट से ज्यादा फीस पड़ रही है वहीं कुछ स्टूडेंट्स को कम फीस जमा करनी पड़ी। पोर्टल पर हो रही खामियों को दूर करने के लिए अब सरकार की ओर से आईआईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के सरकारी संस्थानों के विशेषज्ञों को बुलाया गया है। यह मामला न केवल हमारे सरकारी सिस्टम की पोल खोल रहा है, अपितु यह भी प्रमाणित कर रहा है कि हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था बेहतर होने के बजाय उसका अंतिम संस्कार हो रहा है। मध्यप्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर तमाम परीक्षाओं के पर्चे ऐसे लीक हो जाते हैं, मानो घर की बात हो। गोपनीयता रखने में व्यवस्थाएं पूरी तरह फेल हैं। यही नहीं, हमारी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से निजी हाथों में बेचने की तैयारी हो रही है। एनटीए की कमान एक घोटाले के आरोपी को दे दी गई, वहां भी घोटाला हुआ। पर्चा लीक हुआ, उसकी जांच भले सीबीआई को दे दी गई, लेकिन उच्च पद पर बैठे किसी की भी जिम्मेदारी तय नहीं की गई। अब सीबीएसई में बड़ी गड़बड़ी सामने आ गई। गलती भी खुद स्वीकार की जा रही है, लेकिन जिम्मेदारी किसी की यहां भी नहीं है। लगता है, हमने पूरे तंत्र को घोटाला करने के लिए ही बैठाया है, जो केवल आम आदमी को लूटने में लगा है। जिसे पास कराना है, उसे ही कराया जाएगा। जिसे भर्ती कराना है, उसके लिए कुछ भी किया जाएगा। साफ दिख रहा है। लेकिन करोड़ों लोग इस अपराध पर मौन हैं, क्योंकि वो खुद अपराधी हैं। जो सच बोलने का साहस कर रहे हैं, उन्हें कोई काकरोच कह देता है, कोई देशद्रोही और कोई आतंकी। यह दौर कहां खत्म होगा, कहा नहीं जा सकता।
सीबीएसई की चूक, लेकिन छात्रों के भविष्य का क्या…?- संजय सक्सेना
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