नई दिल्ली। अक्सर लोग इमली के गूदे का खट्टा-मीठा स्वाद लेने के बाद उसके बीजों को बेकार समझकर फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, जिसे आप कचरा समझ रहे हैं, वह असल में पोषक तत्वों और औषधीय गुणों का अनमोल खजाना है? आयुर्वेद में इमली के बीजों (Tamarind Seeds) का उपयोग लंबे समय से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा रहा है। प्रोटीन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर ये छोटे-छोटे बीज हमारे पूरे शरीर को निरोगी रखने की ताकत रखते हैं।
अगर आप अक्सर पेट की समस्याओं से परेशान रहते हैं, तो इमली के बीज का चूर्ण बेहद मददगार साबित हो सकता है। इसमें मौजूद भारी मात्रा में फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है और कब्ज जैसी पुरानी दिक्कतों से हमेशा के लिए राहत दिलाता है। इसके अलावा, बढ़ती उम्र में जोड़ों के दर्द और सूजन से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए भी यह किसी वरदान से कम नहीं है। इसके सूजनरोधी तत्व घुटनों के दर्द में तेजी से आराम पहुंचाते हैं। दिल की सेहत का ख्याल रखने से लेकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाने तक, यह बीज संक्रमण और बदलते मौसम की बीमारियों से हमारी रक्षा करता है। यही नहीं, इसके एंटीऑक्सीडेंट्स आपकी त्वचा को भी हमेशा जवां और चमकदार बनाए रखते हैं।

चूंकि ये बीज काफी सख्त होते हैं, इसलिए इन्हें सीधे चबाना मुश्किल है। इन्हें इस्तेमाल करने के लिए पहले अच्छी तरह भून या उबाल लें, फिर पीसकर इसका महीन चूर्ण बना लें। हालांकि, यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि, इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करें। किसी भी गंभीर बीमारी के इलाज के तौर पर इसे डाइट में शामिल करने से पहले एक बार डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
