भोपाल/काशी। उत्तर प्रदेश प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अवलोकन कर देश की प्राचीन कालगणना के प्रति अपनी गहरी रुचि प्रदर्शित की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की गई यह घड़ी अब काशी आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गई है। प्रधानमंत्री ने न केवल इस घड़ी को करीब से देखा, बल्कि इसकी जटिल और सटीक कार्यप्रणाली को भी बारीकी से समझा। उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के विद्वानों द्वारा तैयार की गई यह घड़ी आधुनिक समय के बजाय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के प्राचीन भारतीय समय सिद्धांतों पर आधारित है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस घड़ी के माध्यम से उज्जैन को पुनः ‘प्राइम मेरिडियन’ (मुख्य मध्याह्न रेखा) के रूप में स्थापित करने के मिशन पर हैं। उनका मानना है कि, पश्चिमी संस्कृति द्वारा थोपा गया ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) वैज्ञानिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है क्योंकि वह आधी रात को दिन की शुरुआत मानता है, जबकि भारतीय संस्कृति सूर्योदय को नव-प्रभात का आधार मानती है। यह वैदिक घड़ी केवल घंटे और मिनट ही नहीं बताती, बल्कि मुहूर्त, ग्रहों की स्थिति, सूर्योदय और पंचांग की सटीक खगोलीय जानकारी भी प्रदान करती है। उज्जैन की कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण इसे वैज्ञानिक रूप से समय गणना का सबसे सटीक केंद्र माना गया है। काशी विश्वनाथ परिसर में इसकी स्थापना भारतीय ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो दुनिया को भारत की समृद्ध कालगणना पद्धति से परिचित करा रहा है।
