देश में पहली पहल: टूटते परिवारों को जोड़ने की नई मुहिम

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रायपुर। तेजी से बदलते सामाजिक ढांचे में रिश्तों की जटिलताएं नई चुनौतियां लेकर आती हैं। अक्सर घर के भीतर पनपने वाली पीड़ा—चाहे वह बुजुर्गों की उपेक्षा हो या पुरुषों का मानसिक तनाव—अनसुनी रह जाती है। लेकिन छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने इस खामोशी को आवाज़ देने के लिए एक नई पहल शुरू की है। सेक्टर-6 स्थित महिला थाना का परिवार परामर्श केंद्र अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुरुष और वरिष्ठ नागरिक भी यहां अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंच सकते हैं। केंद्र में जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग लागू की गई है, जिससे सभी पक्षों को निष्पक्ष और संतुलित सुनवाई का अवसर मिलता है। इस पहल की महत्वपूर्ण कड़ी पुरुष काउंसलर की नियुक्ति है, जो पुरुषों के मानसिक, आर्थिक और वैवाहिक तनाव को समझने में मदद करता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि काउंसलिंग आधारित समाधान विवादों को प्रारंभिक स्तर पर ही सुलझाने में मदद करता है, जिससे परिवारों में सामंजस्य और सामाजिक स्थिरता बढ़ती है। दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल के अनुसार, संवाद और परामर्श की प्रक्रिया पति-पत्नी के बीच बढ़ते विवादों को गंभीर होने से पहले ही रोकने में कारगर साबित हो रही है। केंद्र में ‘सीनियर सिटीज़न सपोर्ट बेंच’ भी बनाई गई है, जिसमें रिटायर्ड अधिकारी, मनोवैज्ञानिक और समाजसेवी बुजुर्गों से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता से सुनते हैं।
अब तक इस केंद्र में लगभग 200 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से करीब 130 का सफल निराकरण किया गया है। दुर्ग का यह ‘काउंसलिंग-फर्स्ट’ मॉडल छत्तीसगढ़ में अपनी तरह की पहली पहल माना जा रहा है और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रभावी उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।