दुर्ग। भीषण गर्मी, तपती धूप और लगातार चल रही लू में बार-बार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। इस गंभीर स्थिति को लेकर आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा पद्मनाभपुर स्थित विद्युत मंडल (CSEB) कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से सीधे संवाद कर जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

कार्यालय में वोरा ने विद्युत मंडल के कार्यपालक निदेशक संजय खंडेलवाल और पद्मनाभपुर जोन के अधिकारी दिलेन्द्र देशमुख से मुलाकात कर जिले में हो रही बिजली कटौती, बढ़े हुए बिल और उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों पर विस्तार से चर्चा की। वोरा ने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं।
वोरा ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हाल ही में राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली दरों में की गई वृद्धि अनुचित है। वर्ष 2026 के लिए लागू नए टैरिफ में औसतन 1.89 प्रतिशत से लेकर 8 प्रतिशत से अधिक तक की बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बढ़ोतरी राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का परिणाम है, जिसका खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
वर्तमान परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए वोरा ने कहा कि एक ओर सरकार राज्य को “ऊर्जा अधिशेष” बताने का दावा करती है, जहां 30,000 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर लगातार बिजली कटौती और आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने इसे सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच का स्पष्ट विरोधाभास बताया। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि हाल के महीनों में दुर्ग और रायपुर सहित कई क्षेत्रों में समय पर बिल भुगतान करने के बावजूद स्वचालित बिजली कनेक्शन कटने (ऑटोमैटिक डिस्कनेक्शन) की शिकायतें सामने आई हैं, जिस पर नियामक आयोग को भी संज्ञान लेना पड़ा है। इस प्रकार की तकनीकी खामियां आम उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन रही हैं।
