आपकी बात, गैर जिम्मेदार विपक्ष – गिरीश पंकज

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जब से एनडीए की सरकार केंद्र में विराजमान हुई है, तब से पूरे देश का अनुभव है कि संसद के हर सत्र में विपक्ष ने भयंकर हंगामा किया है। वह भी अनावश्यक। प्रधानमंत्री अपना भाषण दे रहे हैं तो उस दौरान नारेबाजी करना और वॉक आउट कर जाना। यह लगातार हुआ है। चाहे लोकसभा हो या राज्यसभा, दोनों सदनों में विपक्ष सत्ता पक्ष की बात न सुनकर पहले नारेबाजी करता है और बाद में बहिर्गमन। इस बार भी वही हुआ।सबसे दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि एक निर्वाचित प्रधानमंत्री को विपक्षी लोग तरह-तरह की गालियाँ देते हैं। आजादी के बाद से यह शायद पहला अवसर होगा जब किसी प्रधानमंत्री को विपक्ष की ओर से कटुतापूर्ण गालियां दी जाती रही हों। ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’, ‘ गंदी नाली का कीड़ा’ जैसे शर्मनाक जुमले प्रधानमंत्री के लिए बोले जाते रहे हैं। और मजे की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन तमाम गलियों को हँसते हुए सहते रहे हैं। इसीलिए पिछले दिनों उन्होंने सदन में कहा कि सन 2014 से सत्ता में आने के बाद से एक भी सत्र ऐसा नहीं गया, जब मुझे गालियाँ न दी गई हों। फिर मोदी ने हँसते हुए कहा कि अगर कोई मुझसे मेरी सेहत का राज पूछता है, तो उसे उत्तर देता हूं कि मैं रोज दो किलो गलियां खाता हूं। “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” जैसे गंदे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके प्रति गहरी नफरत होने के बावजूद लोग उनकी कब्र नहीं खोद पाएंगे क्योंकि करोड़ों भारतीयों का आशीर्वाद उनकी ढाल है। यह तो प्रधानमंत्री के उदारता है कि वह मनोविनोद के साथ विपक्ष की गलियों को का स्वागत करते हैं। लेकिन विपक्ष को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि वह एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के लिए कैसे-कैसे शब्दों का प्रयोग करता हैं। प्रधानमंत्री मोदी पर वोट चोरी का आरोप कांग्रेसी लगाते रहे हैं, उसका जवाब भी प्रधानमंत्री ने मजेदार तरीके से दिया कि चोरी करना तो कांग्रेस का पुश्तैनी धंधा है इसीलिए तो उन्होंने एक गुजराती का सरनेम (गांधी) ही चुरा लिया। मोदी जी ने नेहरू और इंदिरा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि ये लोग देश की जनता को ही एक समस्या मानते थे। मोदी जी ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब किसी ने इंदिरा गांधी से पूछा कि उनके पिता नेहरू को भारत में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने उत्तर दिया था 35 करोड़ आबादी। इंदिरा गांधी से भी जब किसी ने समस्याओं के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा 57 करोड़ आबादी।उस समय भारत की आबादी इतनी थी। अब तो 140 करोड़ है।मोदी जी ने कहा कि कांग्रेस भारतीयों को समस्या मानती थी जबकि उनकी सरकार भारतीयों को ताकत मानती है। राष्ट्रपति के ही भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री को देना था लेकिन विपक्ष की ओर से इतना हंगामा हुआ कि उनका भाषण ही नहीं हो सका। सुरक्षा कारणों से उन्हें सदन में आकर भाषण न देने की सलाह दी गई। इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा तो नहीं कहा जा सकता। आखिर प्रधानमंत्री कहते क्या हैं, इसे तो विपक्ष को सुनना चाहिए था। मोदी ने राज्यसभा में डेढ़ घंटे तक भाषण दिया और यही कहा कि यह लोकतंत्र का अपमान है। और ऐसा करना कांग्रेस के स्वभाव में है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सांसद बिट्टू को राहुल गांधी ने गद्दार कहा तो इस पर भी मोदी ने आपत्ति जताते हुए कड़े शब्दों में कहा कि “कांग्रेस के शातिर दिमाग वाले नेता ने एक सदस्य को गद्दार कहा यह कोई छोटा शब्द नहीं है।देश कैसे बर्दाश्त कर सकता है किसी नागरिक को गद्दार कहा जाए।” कुल मिलाकर विपक्ष संसद में हंगामा खड़ा करके एक तरह से लोकतंत्र का अपमान ही करता है, क्योंकि जनता उन्हें चुन कर सदन में इसलिए भेजती हैं कि वे वहां जाकर महत्वपूर्ण मुद्दे उठाएंगे, अपने विचार व्यक्त करेंगे न कि हंगामा।