रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में आदिवासियों की जमीन के क्रय-विक्रय और कब्जे का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा से सवाल करते हुए 2022-23 से जनवरी 2026 तक क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की जमीन से जुड़े प्रकरणों का ब्योरा मांगा।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने सदन को बताया कि जशपुर जिले के पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र में उक्त अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170 के तहत कुल 19 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी भूमि के अवैध क्रय-विक्रय का कोई मामला अब तक प्रकाश में नहीं आया है। हालांकि दो प्रकरणों में अवैधानिक कब्जा पाए जाने पर आदिवासी भूमिस्वामियों को जमीन वापस करने का आदेश पारित किया गया है। इनमें से एक मामले में 16 जनवरी और दूसरे में 10 फरवरी को कब्जा दिलाया गया।
मंत्री के जवाब पर विधायक गोमती साय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन आदिवासियों को जमीन वापस मिलनी थी, उन्हें अब तक वास्तविक कब्जा नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से आंकड़ों की सत्यता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई प्रकरणों में जमीन वापसी की प्रक्रिया अधूरी है।
सदन में चर्चा के दौरान विधायक भावना बोहरा ने कवर्धा जिले में आदिवासी जमीन की कथित गलत तरीके से खरीदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कलेक्टर की अनुमति से कई मामलों में जमीन का स्वरूप बदला जाता है, जिससे विवाद की स्थिति बनती है।
इस पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासी को हस्तांतरित करने के लिए कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य है और यदि कहीं गलत तरीके से जमीन का अंतरण हुआ है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी भाइयों की जमीन के संरक्षण के लिए ही भू-राजस्व संहिता में विशेष प्रावधान किए गए हैं।
