वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में शांति कैसे बहाल होगी? ये सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच जारी जंग से जुड़ी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप की पहल पर US और ईरान के बीच वार्ता होगी। शांति वार्ता की इस पहल के बाद कई शर्तों के आधार पर युद्ध रोके जाने को लेकर सहमति बन सकती है। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सिओस के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला प्रशासन ईरान के साथ शांति वार्ता की संभावनाओं पर प्रारंभिक चर्चा शुरू कर चुका है। एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी और जानकार सूत्र के हवाले से इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 28 फरवरी से शुरू हुई जंग के बाद बीते तीन हफ्ते में वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ है। हालांकि, मिस्र, कतर और ब्रिटेन ने दोनों पक्षों तक संदेश पहुंचाए हैं। शनिवार को आई एक्सिओस की इस रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी और दो अन्य जानकार सूत्रों के हवाले से लिखा, मिस्र और कतर ने अमेरिका के साथ-साथ इस्राइल को भी सूचित किया है कि ईरान बातचीत करना चाहता है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बमबारी से हुए नुकसान की एवज में मुआवजे की मांग की है। तेहरान की तरफ से भविष्य में युद्ध न होने की गारंटी दिए जाने जैसी कड़ी शर्तें भी रखी गई हैं। एक्सिओस ने अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि वाशिंगटन ईरान से छह बिंदुओं पर प्रतिबद्धता चाहता है। अमेरिका की तरफ से जिन प्रतिबद्धताओं की बात कही गई है ये क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान शांति बहाली से पहले इन शर्तों को पूरा करे। इस रिपोर्ट के अनुसार, पहली तीन प्रतिबद्धताओं में मिसाइल और यूरेनियम यानी परमाणु से जुड़े मसले शामिल हैं। इसके मुताबिक ईरान अगले पांच साल तक कोई मिसाइल कार्यक्रम नहीं चलाएगा। जिन बिंदुओं पर समझौते होने हैं, उनमें यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाना भी शामिल है। अमेरिका चाहता है कि ईरान नतान्ज़, इस्फहान और फ़ोर्डो परमाणु केंद्रों पर काम बंद करे। बता दें कि इन केंद्रों पर अमेरिका और इस्राइल ने गत वर्ष भी भीषण बमबारी की थी। इसके अलावा सेंट्रीफ्यूज और संबंधित मशीनरी के निर्माण व उपयोग पर भी ईरान से प्रतिबद्धता की अपेक्षा की गई है। अमेरिका चाहता है कि परमाणु से जुड़े इन उपकरणों पर सख्त और बाहरी निगरानी के प्रोटोकॉल बनाकर उसका पालन सुनिश्चित किया जाए।
बीते तीन हफ्ते से अधिक समय से जारी जंग के बीच अमेरिका ने क्षेत्रीय देशों के साथ हथियार नियंत्रण संधियों पर भी जोर दिया है। इस पांचवीं प्रतिबद्धता के तहत अमेरिका चाहता है कि ईरान अधिकतम 1,000 मिसाइलें ही रखे। किसी भी स्थिति में मिसाइलों की संख्या इससे अधिक नहीं होनी चाहिए। एक्सिओस की इस रिपोर्ट में अमेरिका की तरफ से की गई कई अन्य अपेक्षाओं का भी जिक्र है। इसके मुताबिक ईरान को लेबनान में हिजबुल्ला, यमन में हूती विद्रोहियों और गाजा में हमास जैसे प्रॉक्सी संगठनों को दी जा रही कथित वित्तीय सहायता बंद करनी होगी। इस रिपोर्ट में दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों की क्षमता और भूमिका की तरफ भी संकेत किया गया है। इसके मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची को ‘फैक्स मशीन’ मानते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वे अमेरिका की तरफ से ईरान में वास्तविक निर्णय लेने वालों की पहचान करने और उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
