मैरी कॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया का छत्तीसगढ़ आगमन

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  • युवाओं को मेहनत करने और बड़े सपने देखने को प्रेरित किया
  • बाक्सर मैरी काम ने छत्तीसगढ़ में खेलों को लेकर बढ़ते उत्साह की सराहना की
  • बाइचुंग भूटिया ने छत्तीसगढ़ में खेल प्रणाली में बदलाव पर जोर दिया

रायपुर । अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मैरी कॉम और पूर्व भारतीय फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया ने रायपुर के साइंस कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत की,
इस दौरान मैरी कॉम ने युवा खिलाड़ियों को कड़ी मेहनत करने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सरकार और समाज की ओर से खिलाड़ियों को बेहतरीन सुविधाएं और मंच मिल रहा है। जिससे उन्हें आगे बढ़ने में काफी मदद मिल रही है। बाक्सर मैरी काम ने छत्तीसगढ़ में खेलों को लेकर बढ़ते उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में बड़े स्पोर्ट्स इवेंट आयोजित होना अपने आप में बड़ी बात है। इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक प्रतिभा की कमी नहीं है। यहां के युवाओं में फुर्ती, ताकत और स्टैमिना भरपूर है। यदि इन्हें सही मार्गदर्शन, आधुनिक ट्रेनिंग और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों, तो यहां के खिलाड़ी आसानी से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।

युवाओं से की अपील, सोशल मीडिया से रहे दूर, मैदान में दे अधिक समय

मैरी काम ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम भी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया के बजाय मैदान में अधिक समय दें और किसी भी खेल को पूरी समर्पण भावना से अपनाएं। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में अपनी मौजूदगी को लेकर उन्होंने खुशी जताई और कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में खेल संस्कृति को मजबूत करने का बड़ा माध्यम हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ से कई खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकेंगे।

खेल प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

पूर्व भारतीय फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया ने बताया कि छत्तीसगढ़ में खेल के प्रति लोगों का नजरिया बदल रहा है। खेल की व्यवस्था सुधार को लेकर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के बच्चों में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। बरसते उन्हें सही दिशा-निर्देश और कोचिंग की आवश्यकता है। जिसमें जमीन स्तर से लेकर पूरी सिस्टम को बेहतर करना होगा। वहीं, पूरी देश में स्पोर्ट्स को लेकर परिवर्तन आ रहा है। स्पोर्ट्स को लेकर एक पूरा कल्चर बनाना होगा। आप जहां भी जाए स्पोर्ट्स की चर्चा होनी चाहिए। घर में बैठकर रात को एकसाथ पूरा परिवार स्पोर्ट्स चैनल देखे, तो इस तरह का माहौल बनाना पड़ता है। वह धीरे-धीरे हो रहा है। हालांकि इसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन ज्यादातर जो पार्ट है। वह क्रिकेट ने ले लिया है। लेकिन दुर्भाग्यवश क्रिकेट एक ओलंपिक स्पोर्ट्स नहीं है, बहुत कम देश इसे खेलते हैं। हम लोग क्रिकेट के ऊपर बहुत ज्यादा फोकस्ड हैं। तो मुझे लगता है कि दूसरे स्पोर्ट्स को भी फोकस में लाना बहुत जरूरी है। यह काफी महत्वपूर्ण भी हो जाता है। मुझे लगता है कि समय जरूर लगेगा लेकिन परिवर्तन देखने को मिलेगा।

बाईचुंग भूटिया ने उठाए खेल व्यवस्था पर सवाल
बाइचुंग भूटिया ने कहा कि खिलाड़ियों में पोटेंशियल है, लेकिन मेडल नहीं आने के कई कारण हैं। एक ही कोच के भरोसे रहना, कोच को ट्रेनिंग नहीं देना और कई सालों तक एक ही पद पर जमे रहना बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि जब मेडल आ ही नहीं रहे हैं, तो ऐसे में उनके पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है। न वे किसी को आगे आने देते हैं और न खुद हटते हैं, बस कुर्सी से चिपक कर बैठे रहते हैं।भूटिया ने यह भी कहा कि खिलाड़ियों को सही ट्रेनिंग और बेहतर व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। जब तक इस व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक यह शिकायत बनी रहेगी कि मेडल क्यों नहीं आ रहे हैं?