नई दिल्ली। देशभर में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में मंगलवार को कोई बदलाव नहीं किया गया। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते संकट के चलते गैस सप्लाई को लेकर चिंता गहराने लगी है। आपको बता दें की पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का करीब 60 फीसदी सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के जरिए करता है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव भारत के लिए जोखिम बढ़ा रहा है। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
स्थिति को देखते हुए सरकार ने एलपीजी को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के दायरे में रखा है। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कमर्शियल उपभोक्ताओं की सप्लाई को उनकी जरूरत के लगभग एक-पांचवें हिस्से तक सीमित किया गया है, ताकि आम लोगों की रसोई प्रभावित न हो। इससे पहले 7 मार्च को एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। घरेलू सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) 60 महंगा हुआ था, जबकि कमर्शियल सिलेंडर (19 किलोग्राम) 115 तक बढ़ा था। इसके बाद से अब तक कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
जाने शहरों के अपडेट :
नई दिल्ली: घरेलू ₹913 | कमर्शियल ₹1,883
मुंबई: घरेलू ₹912.50 | कमर्शियल ₹1,835
कोलकाता: घरेलू ₹939 | कमर्शियल ₹1,990
चेन्नई: घरेलू ₹928.50 | कमर्शियल ₹2,043.50
सरकार गैस सप्लाई को मजबूत करने के लिए शहरी गैस परियोजनाओं (CGD) को तेजी से मंजूरी दे रही है और PNG (पाइप्ड गैस) को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, कमर्शियल सेक्टर में एलपीजी पर निर्भरता कम करने की योजना है। मौजूदा समय में तेल कंपनियां केवल दो से तीन दिन का स्टॉक रखती हैं, जो संकट की स्थिति में चुनौती बन सकता है। ऐसे में सरकार अब दीर्घकालिक भंडारण (कैवर्न स्टोरेज) बढ़ाने पर भी काम कर रही है। एलपीजी सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए भारत अब अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से आयात बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने अमेरिका से एलपीजी आयात के लिए समझौता किया है, जो कुल आयात का लगभग 10% कवर करेगा।
