महंगाई: राहत और आफत
सर्वे के मुताबिक, अगले साल महंगाई दर में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन यह आरबीआई के तय दायरे में ही रहेगी।
• चिंता की बात: रुपये में गिरावट आने से विदेश से सामान मंगाना महंगा हो सकता है, जिसे ‘इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन’ कहा जाता है। इसके अलावा सोना, चांदी और तांबे जैसी धातुओं की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, जिससे कोर इन्फ्लेशन पर दबाव रहेगा।
• राहत की बात: अच्छी खबर यह है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी के दाम घट रहे हैं। साथ ही, अच्छी फसल के कारण खाने-पीने की चीजों के दाम भी काबू में रहने की उम्मीद है, जो महंगाई को ज्यादा बढ़ने नहीं देंगे।
बिजनेस और इंडस्ट्री पर असर
सर्वे और हालिया व्यापार समझौतों का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर भी दिखने वाला है। भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारतीय ऑटो सेक्टर सतर्क हो गया है।
• सस्ती होंगी विदेशी कारें: यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क 110% से घटकर 10% होने जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, इससे टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी देसी कंपनियों को यूरोपीय कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है।
• वाइन इंडस्ट्री: इस समझौते से यूरोप की वाइन सस्ती होगी, जिसका असर भारत की प्रमुख वाइन कंपनी ‘सुला विनयार्ड्स’ पर पड़ सकता है।
ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद
महंगाई के काबू में रहने और ग्रोथ को सहारा देने के लिए आरबीआई अगले हफ्ते ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। यह इस साइकिल की आखिरी कटौती हो सकती है, जिससे होम लोन और कार लोन लेने वालों को थोड़ी और राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर आर्थिक सर्वे का संदेश साफ है- भारत की ग्रोथ स्टोरी मजबूत है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनी रहेगी। हालांकि, कमजोर रुपया और ग्लोबल मार्केट की उथल-पुथल के बीच सरकार को फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे।