भारत का कर्जदार हुआ बांग्लादेश: 14 महीनों में यूनुस सरकार ने चढ़ा दिया 1 लाख करोड़ का भारी कर्ज

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मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का कार्यकाल बांग्लादेश में खत्म हो चुका है. इस 14 महीने के कार्यकाल में मोहम्मद यूनुस सरकार ने बांग्लादेश पर न सिर्फ कर्ज का बोझ बढ़ा दिया, बल्कि विकास कार्यों पर भी कोई ध्यान नहीं दिया, मेगा प्रोजेक्ट्स जो पाइपलाइन में थे, उन पर कोई काम नहीं किया गया है. बांग्लादेश के वित्त मंत्रालय ने बुलेटिन जारी कर देश की आर्थिक स्थिति की जानकारी दी है. आवामी लीग की प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने जिस समय सत्ता छोड़ी थी और उस वक्त देश का घरेलू और विदेशी कुल कर्ज 18 लाख 88 हजार 787 करोड़ टका था.

बांग्लादेश पर भारत का 800 करोड़ डॉलर यानी 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. भारत ने लाइन ऑफ क्रेडिट के जरिए बांग्लादेश को वित्तीय सहायता दी है. मोहम्मद यूनुस के 14 महीने के कार्यकाल में बांग्लादेश का कर्ज 2 लाख 60 हजार 257 करोड़ टका और बढ़ा गया है. आवामी लीग की प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने जिस समय सत्ता छोड़ी थी और उस वक्त देश का घरेलू और विदेशी कुल कर्ज 18 लाख 88 हजार 787 करोड़ टका था, जो अब 21 लाख करोड़ टका को भी पार कर गया है. साल 2009 में जब आवामी लीग बांग्लादेश की सत्ता में आई थी, तब देश का कुल कर्ज 2 लाख करोड़ टका था और 5 अगस्त, 2024 यानी तख्तापलट तक यह बढ़कर 18 लाख 88 हजार 787 करोड़ टका पहुंच गया.

बांग्लादेश की वित्त मंत्रालय के अनुसार 30 सितंबर, 2025 तक बांग्लादेश का कुल घरेलू और विदेशी कर्ज 21 लाख 49 हजार 44 करोड़ टका था यानी 15 लाख 96 हजार 590 करोड़ रुपये. अधिकारियों का कहना है कि मध्य फरवरी तक का हिसाब होने के बाद कर्ज का आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ सकता है. भारत ने बांग्लादेश को सीधे तौर पर नकद ऋण देने के बजाय मुख्य रूप से लाइन ऑफ क्रेडिट के माध्यम से वित्तीय सहायता दी है. बांग्लादेश पर भारत का कर्ज करीब 800 करोड़ डॉलर का है, जो इंडियन करेंसी में 70 हजार करोड़ रुपये और बांग्लादेश करेंसी में यह राशि एक लाख करोड़ टका से ज्यादा बैठती है.

अर्थशास्त्रियों के अनुसार वित्त मंत्रालय के अनुसार इन 14 महीनों में यूनुस सरकार ने बड़े स्तर के मेगा प्रोजेक्ट्स से दूरी बना ली और समग्र विकास व्यय में भारी कटौती हुई. इस सरकार में रेवेन्यू कलेक्शन कम हुआ और बढ़ते ऋण भुगतान की वजह से बांग्लादेश कर्ज पर निर्भर रहा. ढाका में वर्ल्ड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री जाहिद हुसैन का कहना है कि बांग्लादेश पर कर्ज बढ़ने का मुख्य कारण कम रेवेन्यू जुटाना है. जाहिद हुसैन ने कहा कि अगस्त में हुए तख्तापलट के बाद राजनीतिक अस्थिरता और कर वसूली में बाधाओं की वजह से रेवेन्यू उम्मीद से कम रहा, जिसकी वजह से सरकार की वित्तीय स्थिति सीमित रह गई.