रायपुर । रायपुर में कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ, नशे की खेती रोकने और रसोई गैस की किल्लत समेत कई मुद्दों को लेकर विधानसभा का घेराव किया, जिसमें भारत माता चौक पर पुलिस के साथ जमकर धक्का-मुक्की हुई और नारेबाजी की गई। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने आज विधानसभा का घेराव किया। यह घेराव मनरेगा बचाओ, नशे की खेती, रसोई गैस की किल्लत और प्रदेश के स्थानीय मुद्दों को लेकर किया गया। इस दौरान भारत माता चौक शंकर नगर में पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने भारत माता चौक के पास बैरिकेडिंग लगाकर कांग्रेसियों को विधानसभा जाने से रोका। कांग्रेसियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट मौजूद रहे। घेराव कार्यक्रम में लगभग 30 हजार से ज्यादा कांग्रेसी कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने केंद्र सरकार पर मनरेगा कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाकर और इसे योजना बनाकर खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम लगभग बंद हो गया है। मनरेगा बंद होने से मजदूर दूसरे प्रदेशों में पलायन कर गए हैं।

इसी संदर्भ में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा कि मनरेगा कोई सामान्य योजना नहीं, बल्कि गरीब और ग्रामीण मजदूरों का कानूनी अधिकार है। इसके तहत हर परिवार को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। लेकिन आज सच्चाई यह है कि यह गारंटी कागजों तक सिमट कर रह गई है। केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह मजदूरी का पूरा भुगतान समय पर करे, लेकिन बार-बार फंड में देरी के कारण मजदूरों की मेहनत की कमाई अटक जाती है। मजदूर हफ्तों नहीं, महीनों तक अपने पैसे का इंतजार करते हैं — यह उनके अधिकारों के साथ सीधा अन्याय है। आज हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि राज्यों पर ही आर्थिक बोझ डाल दिया गया है, जबकि वे पहले से ही जीएसटी के दबाव में जूझ रहे हैं।आज हालात यह हैं कि बहुत कम परिवारों को 100 दिन का पूरा रोजगार मिल पा रहा है। औसतन काम के दिन भी घट गए हैं। इसका सीधा असर यह हुआ है कि ग्रामीण मजदूरों को मजबूरी में पलायन करना पड़ रहा है।
सरकार मनरेगा को मजबूत करने के बजाय इसे कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। बजट में कटौती, काम की कमी और भुगतान में देरी ये सब मिलकर इस योजना की मूल भावना को खत्म कर रहे हैं। और दूसरी ओर, देश में रसोई गैस की स्थिति भी चिंताजनक है। एक तरफ गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, वहीं कई जगहों पर इसकी उपलब्धता भी अनियमित हो गई है। जिस उज्ज्वला योजना के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, आज वही गरीब परिवार गैस भरवाने में असमर्थ हैं। सरकार को चाहिए कि वह अपनी जिम्मेदारी से भागने के बजाय मनरेगा को उसकी मूल भावना के साथ लागू करे, समय पर भुगतान सुनिश्चित करे और रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरतों को हर घर तक सुलभ बनाए — क्योंकि अब जनता सवाल पूछ रही है और जवाब मांग रही है।”
