नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार दशहरे के बाद अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयकों को पारित कराने का प्रयास कर सकती है। इसके लिए आवश्यक बहुमत जुटाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार को उम्मीद है कि इस बार दोनों विधेयकों के समर्थन में पर्याप्त सांसदों का साथ मिल सकता है। हालांकि, विशेष सत्र की आधिकारिक घोषणा और उसकी तारीखों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बताया जा रहा है कि 17 अप्रैल को बजट सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आवश्यक समर्थन नहीं मिल पाया था। विपक्षी दलों की एकजुटता के कारण संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में सरकार सफल नहीं हुई थी। इसके बाद से सरकार समर्थन जुटाने के प्रयास कर रही है।अब करीब पांच महीने बाद सरकार को उम्मीद है कि राजनीतिक दलों से बातचीत के जरिए आवश्यक संख्या जुटाई जा सकती है। हालांकि, विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप समर्थन हासिल करना जरूरी होगा।
रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (द्रमुक) सहित कुछ दलों से समर्थन के लिए बातचीत कर रही है। द्रमुक के लोकसभा में 22 सांसद हैं और वह परिसीमन के मुद्दे पर पहले मुखर विरोध करती रही है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के रुख में बदलाव की संभावना को लेकर राजनीतिक स्तर पर चर्चा चल रही है। हालांकि, द्रमुक के समर्थन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।सरकार कुछ छोटे राजनीतिक दलों से भी संपर्क में बताई जा रही है। विधेयकों को पारित कराने के लिए अलग-अलग दलों का समर्थन कितना महत्वपूर्ण होगा, यह विशेष सत्र की तारीखों और सदन में पेश किए जाने वाले विधेयकों के अंतिम स्वरूप से स्पष्ट होगा।
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सत्रावसान की औपचारिक स्थिति को लेकर विशेष बैठक बुलाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों में विशेष सत्र की तारीखें 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में प्रस्तावित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना जताई गई है।हालांकि, सांसदों को विशेष सत्र के संबंध में अब तक आधिकारिक सूचना दिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। आम तौर पर बैठक से पहले सदस्यों को इसकी सूचना दी जाती है।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा में 540 सदस्य हैं। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास लगभग 319 सांसद हैं, जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसदों की संख्या करीब 189 बताई गई है। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। इसलिए वास्तविक आवश्यक संख्या सदन में मतदान के समय मौजूद सदस्यों पर निर्भर करेगी।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार को कुछ क्षेत्रीय दलों और अन्य सांसदों के समर्थन की उम्मीद है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट और द्रमुक के सांसदों के समर्थन को लेकर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर आगे की स्थिति विशेष सत्र की आधिकारिक घोषणा, विधेयकों के वास्तविक प्रारूप और विभिन्न राजनीतिक दलों के रुख पर निर्भर करेगी।
