राजनाथ सिंह का राहुल गांधी और विपक्ष पर हमला, कहा- लोकतंत्र अराजकता फैलाने का लाइसेंस नहीं

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लखनऊ । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर देश में अराजकता फैलाने और राजनीतिक टकराव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने या कानून-व्यवस्था को चुनौती देने को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को समझना चाहिए कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने अथवा संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने का लाइसेंस नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून का सम्मान करना आवश्यक है और राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।रक्षा मंत्री ने इस संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की हालिया टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव के आगे संवैधानिक संस्थाओं को झुकना नहीं चाहिए।

विरोध-प्रदर्शनों में युवाओं की भागीदारी को लेकर राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण के रचनात्मक कार्यों में लगाने के बजाय राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।उन्होंने कहा कि युवाओं को राजनीतिक लाभ के लिए मोहरे की तरह इस्तेमाल करना गंभीर और अस्वीकार्य है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को युवाओं की शक्ति का उपयोग देश के विकास और सकारात्मक बदलाव के लिए करना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की बांग्लादेश की स्थिति को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बयानों से विपक्षी गठबंधन और सीजेपी की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठते हैं।रक्षा मंत्री ने दावा किया कि विपक्ष का उद्देश्य केवल चुनाव प्रक्रिया का विरोध करना नहीं, बल्कि देश की सत्ता व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकती है और देश में अशांति का माहौल पैदा कर सकती है। ये आरोप राजनाथ सिंह ने अपने राजनीतिक बयान में लगाए।

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए पार्टी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल, वर्ष 1984 में सिखों के खिलाफ हुई हिंसा और वर्ष 1993 में निर्वाचन आयोग की संरचना में किए गए बदलावों का जिक्र किया।उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई थी। रक्षा मंत्री ने निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला से जुड़े पुराने विवाद का भी उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचाने का आरोप लगाया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि जो लोग आज निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात कर रहे हैं, उन्हें अपने राजनीतिक इतिहास पर भी विचार करना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी से राजनीतिक विरोध के दौरान नकारात्मकता और व्यवधान की राजनीति छोडऩे की अपील की। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए।उन्होंने दोहराया कि कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी संस्था की कार्यप्रणाली को राजनीतिक दबाव से प्रभावित करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान और उसमें कथित अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं। कांग्रेस, अन्य विपक्षी दलों और सीजेपी से जुड़े प्रदर्शनकारी इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।वहीं, भाजपा नेता इन आरोपों के जवाब में विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने और संवैधानिक संस्थाओं को विवादों में घसीटने का आरोप लगा रहे हैं। इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है।