नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। खरगे ने इस कार्रवाई को ‘मोदी सरकार की कायरता और असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा’ करार दिया है। अपने एक्स हैंडल पोस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि न्याय की गुहार लगा रहे माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया, जबकि भाजपा के एक ‘वीआईपी’ को राज्यपाल पद से सम्मानित किया गया। सत्ता का यह दमन सरकार की ताकत नहीं, बल्कि सवालों से भागने का प्रमाण है। एक बेटी को खो चुके माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।
कांग्रेस ने क्या कहा?:
कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी इस लड़ाई से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने आगे कहा , ‘बेटी को खो चुके माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। कांग्रेस पार्टी बेटी अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।’ बता दें कि अंकिता भंडारी के माता-पिता को गुरुवार तड़के इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। उसके बाद तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन से रिहा कर दिया गया। अंकिता के माता-पिता की मांग है कि सिक्किम के राज्यपाल के रूप में गौतम की नियुक्ति को तब तक रोक दिया जाए, जब तक कि इस मामले में चल रही सीबीआई जांच पूरी न हो जाए। इसी बीच, कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा, ज्योतिमणि और इमरान प्रतापगढ़ी ने हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस स्टेशन के अंदर विरोध प्रदर्शन किया।
दिल्ली में इंटरनेट बंद करने पर गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, बताई पाबंदी की वजह
केंद्र सरकार पर लगाया गंभीर आरोप:
कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनाते और काजी निजामुद्दीन ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अधिकारी अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया। इससे पहले, कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक स्वतंत्रता में गिरावट को दर्शाती है। यह क्रूरता है। इंडिया गेट पर लोकतंत्र का अंत होते देखा जा सकता है। यह सुबह चार बजे समाप्त हो रहा है।
सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल दुष्यंत गौतम पर निशाना साधते हुए उन्होंने आगे आरोप लगाया कि आरोपियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों को हिरासत में लिया जा रहा है, जबकि आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जा सकता है। खेड़ा ने कहा, ‘इस देश में बर्बरता हो रही है। जिस पर आरोप लगा है वही राज्यपाल बनेगा और अंकिता के माता-पिता जेल जाएंगे? हम बलात्कारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो हम जेल जाएंगे और जिस पर दुष्कर्म का आरोप लगा है वही राज्यपाल बनेगा, क्या यही लोकतंत्र है?’
एसआईआर मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, माकपा सांसद बोले- लोकतंत्र के पक्ष में फैसले की उम्मीद
क्या है पूरा मामला?:
ऋषिकेश के वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली अंकिता की 18 सितंबर, 2022 को हत्या कर दी गई थी। चार दिन बाद उसका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया। इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (जो पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे हैं) और उनके दो साथियों को दोषी ठहराया गया है और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह मामला तब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया, जब यह आरोप लगा कि इस अपराध में कोई अज्ञात वीआईपी भी शामिल था। अंकिता के परिवार और कार्यकर्ताओं ने इस कथित वीआईपी एंगल की जांच की मांग की है। इन आरोपों के सिलसिले में गौतम का नाम भी सामने आया है। हालांकि, गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। कांग्रेस का दावा है कि यह नियुक्ति गौतम को बचाने के लिए की गई है। उनका तर्क है कि पद पर रहते हुए किसी राज्यपाल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।
