राजनांदगॉव में पुलिस ने साइबर ठग को किया गिरफ्तार

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक शातिर साइबर ठग दीपक कुमार बघेल (22 वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जो सोशल मीडिया पर महिलाओं के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवकों को धोखा देता था। आरोपी युवकों से दोस्ती करता, फिर लड़की की आवाज में बातचीत कर विश्वास जीतता और पैसों की मांग करता था। पैसे न मिलने पर धमकी, गाली-गलौज और ब्लैकमेलिंग करता था। मामला तब उजागर हुआ जब लालबाग थाना क्षेत्र की एक युवती को आरोपी ने कॉल कर उसके पिता के सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने की झूठी जानकारी दी। युवती ने जब इस सूचना को गलत बताया, तो आरोपी ने अभद्र भाषा का प्रयोग शुरू कर दिया। बाद में युवती के पिता ने संपर्क किया, तो उन्हें भी गालियां दी गई और जान से मारने की धमकी दी गई।

शिकायत मिलने के बाद लालबाग पुलिस और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए आरोपी की पहचान की। जांच में पता चला कि आरोपी की लोकेशन खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ठेलकाडीह थाना क्षेत्र के ग्राम विष्णुपुर में थी। पुलिस ने घेराबंदी कर दीपक कुमार बघेल को गिरफ्तार किया। पूछताछ और तकनीकी जांच में यह भी सामने आया कि दीपक लंबे समय से सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल चला रहा था। वह युवकों को प्रेमजाल और दोस्ती के नाम पर फंसाकर आर्थिक लाभ लेता था। विरोध करने वालों को अश्लील संदेश, धमकी और ब्लैकमेलिंग के जरिए डराता था।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ साइबर अपराध दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के डिजिटल उपकरणों और सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच जारी है, जिससे अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जाएगी। राजनांदगांव पुलिस ने इस मामले को सोशल मीडिया पर बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति चेतावनी भी बताया। पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन पहचान हमेशा वास्तविक नहीं होती। फर्जी प्रोफाइल के पीछे कौन है, इसका अंदाजा लगाना आम लोगों के लिए आसान नहीं है। ऐसे में किसी अज्ञात व्यक्ति से निजी जानकारी साझा करने या आर्थिक लेन-देन करने से पहले पूरी सतर्कता बरतना जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर दोस्ती, प्रेम या नौकरी के बहाने किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा संपर्क करने पर उसकी पहचान जांचना जरूरी है। किसी भी संदिग्ध संदेश, कॉल या आर्थिक मांग पर तुरंत पुलिस या साइबर सुरक्षा टीम को सूचित करना चाहिए। इस गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हुआ कि पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए साइबर अपराधियों की पहचान कर उन्हें कानून के कटघरे में ला रही है। राजनांदगांव पुलिस ने बताया कि भविष्य में भी साइबर ठगों और ऑनलाइन धोखाधड़ी में लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। इस घटना ने एक बार फिर नागरिकों के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता को उजागर किया है। ऑनलाइन दोस्ती या संपर्क में किसी भी प्रकार की वित्तीय लेनदेन से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल और सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।