नई दिल्ली। एनसीईआरटी (NCERT) की नई पाठ्यपुस्तक को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मामला मोहनजोदड़ो से मिली प्रसिद्ध “डांसिंग गर्ल” कांस्य प्रतिमा से जुड़ा है, जिसे नई किताब में उसके मूल स्वरूप से अलग दिखाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। कक्षा 9 की नई किताब ‘मधुरिमा’ के अध्याय ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में इस ऐतिहासिक मूर्ति की तस्वीर प्रकाशित की गई है, लेकिन इसमें मूर्ति के ऊपरी हिस्से को कपड़ों से ढका हुआ दिखाया गया है। जबकि मूल प्रतिमा, जो सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण खोज मानी जाती है, एक अर्धनग्न कांस्य आकृति है।

यह बदलाव सामने आने के बाद इतिहासकारों और शिक्षा विशेषज्ञों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि, ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ छात्रों की समझ को प्रभावित कर सकती है और यह एक तरह की सेंसरशिप है। कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि, अगर इस तरह बदलाव किए जाते रहे तो क्या संग्रहालयों में रखी मूल ऐतिहासिक धरोहरों को भी बदला जाएगा, वहीं NCERT की ओर से इस मामले पर सफाई देते हुए कहा गया है कि इस बदलाव के पीछे कोई विशेष उद्देश्य नहीं है और अन्य कक्षाओं की पुस्तकों में इस मूर्ति को उसके मूल स्वरूप में भी दर्शाया गया है।
यह कांस्य मूर्ति 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी और अब यह नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रखी है। लगभग 4 इंच ऊंची यह प्रतिमा अपने आत्मविश्वासपूर्ण स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। विवाद बढ़ने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं, जहां कुछ दलों ने इसे शिक्षा प्रणाली में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया है। यह मामला इतिहास की प्रस्तुति और शैक्षिक सामग्री में बदलाव को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।
