नई दिल्ली। आज गुरुवार को शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 32 पैसे टूटकर 95.20 के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया है। इस भारी गिरावट के पीछे, मजबूत अमेरिकी डॉलर और पश्चिम एशिया में गहराता भू-राजनीतिक तनाव, मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें है। वहीं मुद्रा बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच घरेलू शेयर बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली है। आपको बता दें की अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में गुरुवार को रुपया 95.01 पर खुला और जल्द ही 32 पैसे का गोता लगाकर 95.20 पर पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को भी रुपया 20 पैसे गिरकर 94.88 के निचले स्तर पर बंद हुआ था। दरअसल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने के फैसले और वाशिंगटन व तेहरान के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ने के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग में काफी इजाफा हुआ है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स भी 0.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.96 पर कारोबार कर रहा था।
वहीं वैश्विक तेल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड वायदा 3.16 प्रतिशत उछलकर 121.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो लगभग 122 डॉलर के आसपास मंडरा रहा है। ‘फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी’ के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, रुपये पर सबसे बड़ा प्रभाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का पड़ा है, जो 120 डॉलर प्रति बैरल को छू चुका था। भंसाली ने मौजूदा स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखने और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज या टैंकर को गुजरने की अनुमति न देने के कारण तेल की कीमतें और ऊपर जाने की आशंका है”। इस विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में अभी और गिरावट देखी जा सकती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत की आयात लागत में भारी वृद्धि होने की पूरी आशंका है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। पश्चिम एशिया में संभावित व्यापक संघर्ष की चिंताएं निवेशकों की घबराहट लगातार बढ़ा रही हैं, जिससे आने वाले समय में बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।
