जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। लगातार ऑपरेशन और आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाओं के बाद माओवादियों का नेटवर्क काफी कमजोर हो चुका है। हाल ही में माओवादी कमांडर पापाराव और PLGA इंचार्ज सोढ़ी केसा के सरेंडर के बाद सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है।
इसके बावजूद कुछ कट्टर माओवादी अब भी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक अब केवल 5 हार्डकोर माओवादी ही अंडरग्राउंड रहकर सीमावर्ती इलाकों-बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर में सक्रिय हैं। ये माओवादी लगातार अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति पर सुंदरराज पी (बस्तर आईजी) ने स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि, अब माओवादियों के पास मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका है। अगर वे आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो सुरक्षा बल और आक्रामक कार्रवाई करेंगे। उनका कहना है कि, क्षेत्र में अब माओवाद का ढांचा लगभग खत्म हो चुका है।
वहीं शिवधर रेड्डी (तेलंगाना डीजीपी) ने भी माओवादियों से हथियार छोड़ने की अपील दोहराई है। उन्होंने बताया कि, साल 2024 में जहां 125 लोग माओवादी संगठन से जुड़े थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल 5 रह गई है। इन बचे हुए माओवादियों में कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं, जैसे गणपति और महिला कैडर रूपी, जो अब भी अंडरग्राउंड हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि, बस्तर में माओवाद का प्रभाव अब लगभग समाप्ति की ओर है। ऐसे में बचे हुए माओवादियों के सामने दो ही रास्ते हैं-आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटना या फिर कड़ी सुरक्षा कार्रवाई का सामना करना।
