रायपुर । छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2026 पर राज्यपाल रमेन डेका ने 7 अप्रैल को हस्ताक्षर कर दिए हैं। जिससे यह अब एक कानून बन गया है। इस कड़े कानून के तहत जबरन धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष की जेल और सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास का प्रावधान है। यह 1968 के पुराने कानून को प्रतिस्थापित करेगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही के नए मानक
कानून के क्रियान्वयन के लिए विशेष न्यायालयों और विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाएगी ताकि मामलों का त्वरित निस्तारण हो सके. धर्मांतरण में सहायता करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को अपना पंजीकरण कराना होगा और प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर अपनी गतिविधियों और प्राप्त निधियों (घरेलू या विदेशी) की वार्षिक रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को सौंपनी होगी. साक्ष्य का भार (Burden of Proof) उस व्यक्ति पर होगा जिसने धर्मांतरण कराया है, यानी उसे सिद्ध करना होगा कि धर्मांतरण बल या प्रलोभन से नहीं हुआ है।
कानून में प्रमुख प्रावधान
बलपूर्वक या धोखे से किए गए धर्मांतरण पर रोक लगेगी, डिजिटल माध्यमों और प्रलोभन के जरिए होने वाले धर्म परिवर्तन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, झूठी जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अब प्रतिबंधित हो गया।
कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी।
प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी।
30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।
पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख जुर्माना लगेगा।
यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख का जुर्माना होगा।
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख जुर्माना लगेगा।
बैठक में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर चर्चा होगी
गृह मंत्री विजय शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर राज्यपाल स्वयं ही चिंतनशील है। मैं समझता हूं हम और आप अभी बात कर रहे, हो सकता है इस पर हस्ताक्षर हो गया हो। नक्सलवाद समाप्त हुआ है उसके बाद यह बैठक हो रही है। धर्म स्वतंत्र नियम को लेकर भी चर्चा होगी।
सरकार भरोसा दिलाये कानून का दुरुपयोग नही किया जायेगा
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह विधेयक भाजपा के राजनैतिक एजेंडे का हिस्सा था, इसलिए बिना कानूनी पहलू का परीक्षण किए ही राज्यपाल ने हस्ताक्षर कर दिया। यह कानून का रूप धारण कर चुका है तो यह उम्मीद की जाती है कि इस कानून का दुरूपयोग सरकार किसी वर्ग के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों के हनन का माध्यम नही बनेगा।
