लोकसभा में राहुल गांधी और जगदंबिका पाल के बीच नोकझोंक, ट्रेड डील और बजट पर सरकार को घेरा

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नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान चेयर पर बैठे बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल के साथ उनकी हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिली।

दरअसल, राहुल गांधी जब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और केंद्रीय बजट पर बोल रहे थे, तब जगदंबिका पाल उन्हें टोक रहे थे। इस पर राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “आप कांग्रेस के पुराने मेंबर हैं, इसलिए मैं आज एक खास एहसान करूंगा, मैं पीछे हट जाऊंगा। आप जानते हैं कि हमें आपसे प्यार है। हम जानते हैं कि आपका दिल वहां नहीं है, आपका दिल यहां है।”

इस पर जगदंबिका पाल ने जवाब दिया, “मैं यहां प्रीसाइडिंग ऑफिसर के तौर पर हूं। आप मेरी बात मानते तो आप वहां नहीं बैठते।”

गौरतलब है कि जगदंबिका पाल 2014 तक कांग्रेस में थे और लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे। वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

ट्रेड डील पर राहुल का हमला
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता बराबरी की शर्तों पर नहीं हुआ और इससे देश के किसानों के हित प्रभावित होंगे।

राहुल ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौते में किसानों के हितों को कुचला गया है। उन्होंने दावा किया कि पहले भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में शुल्क लगभग 3 प्रतिशत था, जो अब 18 प्रतिशत हो गया है, जबकि अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क 16 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत का डेटा अहम भूमिका निभाता है। राहुल गांधी के मुताबिक, अगर इंडिया गठबंधन की सरकार होती तो वह अमेरिका से बराबरी के स्तर पर बातचीत करती और भारतीय किसानों व बाजार की सुरक्षा को प्राथमिकता देती।

“किसानों पर पड़ेगा असर”
राहुल गांधी ने कहा कि फ्री ट्रेड की शर्तों का सबसे ज्यादा असर गांव और किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि समझौते के बाद अमेरिका तय करेगा कि भारत तेल किससे खरीदेगा।

उन्होंने कहा, “हम अपने किसानों की रक्षा करेंगे। भारत को पाकिस्तान के बराबर नहीं खड़ा किया जा सकता।”

राहुल गांधी ने बजट को लेकर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि आर्थिक नीतियों का असर आम जनता और किसानों पर पड़ रहा है।

लोकसभा में उनके भाषण और चेयर के साथ हुई हल्की नोकझोंक ने सदन का माहौल कुछ देर के लिए हल्का जरूर कर दिया, लेकिन व्यापार समझौते और बजट को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।