पोर्टा केबिन घटना : जांच समिति ने खोली पोल, अधीक्षक और ट्राइबल विभाग की लापरवाही आई सामने

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रायपुर। बीजापुर जिले के गंगालूर क्षेत्र के पोर्टा केबिन छात्रावास की पढ़ने वाली तीन छात्राएं गर्भवती मामले में आम आदमी पार्टी ने प्रदेश संयुक्त सचिव पूर्णिमा सिन्हा के नेतृत्व में जांच समिति गठित की गयी थी। इसी मामले में जांच समिति के सदस्य और प्रदेश संगठन मंत्री समीर खान ने पत्रकार वार्ता में अपनी रिपोर्ट में बताया कि मामला प्रकाश में आने के बाद शिक्षा और प्रशासनिक विभाग मामले की जांच करने की बजाय लीपापोती करने में लगा हुआ था । गर्भवती तीन छात्राओं में से दो 12वीं की, तो एक 11वीं कक्षा में पढ़ रही हैं। दोनों छात्राएं बोर्ड की परीक्षा देने गई थीं, तो इस दौरान मामले का खुलासा हुआ था।

प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ़ ने कहा कि यह घटना छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही है।
छात्रावास की एक बच्ची के साथ ऐसे ही दो बार घटना हो चुकी है। जिले में 2-2 डीईओ होने के बावजूद ऐसी घटना होना चिंतनीय है।वहां अधीक्षक की लापरवाही पाई गयी।छात्रावास मे कोई अनुशासन नहीं है।वहां के कैमरे भी बंद हैं। छात्रावास मे कोई भी अच्छी सुविधा नहीं है।

प्रदेश प्रवक्ता जयदीप खनूजा ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि हॉस्टल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये हैं। इसमें ट्रायबल विभाग की भी लापरवाही है। सवाल यह है कि यदि छात्राएं लंबे समय से गर्भवती थीं, तो इसकी जानकारी प्रबंधन को समय पर क्यों नहीं मिली? वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की सूचना प्रबंधन को क्यों नहीं दी? छात्रावास के अधिकारी-कर्मचारी क्या कुंभकर्णी नींद में सोये हुए थे? इससे पूर्व भी पोर्टा केबिन स्थित इस हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है लेकिन पूरे मामले की सरकार को निष्पक्ष जांच करवाना चाहिए और दोषी पाए जाने वाले बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो ताकि आने वाले समय में आदिवासी बच्चियों के साथ ऐसा अन्याय ना हो।