बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या के मामले में आरोपी की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने अहम फैसले में DNA प्रोफाइलिंग को इस मामले का सबसे मजबूत और निर्णायक सबूत माना।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि, जब वैज्ञानिक साक्ष्य, खासकर DNA रिपोर्ट, भरोसेमंद हो और अन्य सबूतों से मेल खाती हो, तो वही सजा तय करने के लिए पर्याप्त आधार बन सकती है। यह मामला बीजापुर जिले का है, जहां 13 जनवरी 2020 को एक नाबालिग लड़की बाजार जाने के दौरान लापता हो गई थी। आरोपी ने बच्ची की दादी को भरोसा दिलाकर उसे अपने साथ ले गया, लेकिन बाद में उसकी लाश बरामद हुई। पीएम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई। जांच के दौरान मृतका के शरीर से मिले सैंपल की DNA जांच कराई गई, जो आरोपी से मैच हो गई।
पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और गवाहों के बयान दर्ज किए, जिनसे केस और मजबूत हुआ। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप और हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया है। हाईकोर्ट ने कहा कि, सभी सबूतों को एक साथ देखने पर यह साफ साबित होता है कि, अपराध सुनियोजित और जघन्य था। आरोपी 19 जनवरी 2020 से जेल में है और अब उसे निर्धारित सजा पूरी करनी होगी। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि, आरोपी चाहे तो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है और इसके लिए उसे लीगल सर्विसेज कमेटी की सहायता मिल सकती है।
