रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के खिलाफ कानून को और सख्त करने की दिशा में साय सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ फ्रीडम ऑफ रिलीजन संशोधन विधेयक 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रायपुर में हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य जबरदस्ती, लालच, प्रलोभन या धोखाधड़ी से किए जाने वाले धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाना है। इसके लिए मौजूदा कानून को और मजबूत बनाया जाएगा।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि कई जगहों पर लालच और गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए कानून में कड़े प्रावधान लाए जा रहे हैं, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
हालांकि विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि सरकार धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर सदन में स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही है और कई मुद्दों पर भ्रम की स्थिति बना रही है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यह विधेयक विधानसभा में पेश होगा। यदि सदन से पारित हो जाता है, तो छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए और कड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं। फिलहाल विधानसभा सत्र में इस बिल पर होने वाली चर्चा पर सबकी नजर टिकी हुई है।
