खड़गे पर टिप्पणी से सियासत गरमाई: रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन, हिमंत बिस्वा सरमा का पुतला फूंका

Follow Us

रायपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर दिए गए बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए रायपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और उनका पुतला दहन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने बयान को अपमानजनक बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुमार मेनन ने किया। उन्होंने कहा कि, किसी भी वरिष्ठ और सम्मानित नेता के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि, मल्लिकार्जुन खड़गे न केवल अनुभवी नेता हैं, बल्कि समाज के वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना निंदनीय है। कुमार मेनन ने आरोप लगाया कि, इस तरह के बयान देकर जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और अन्य जन समस्याओं पर चर्चा से बचने के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस स्वीकार नहीं करेगी।

वहीं, छत्तीसगढ़ यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा ने भी इस बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि, यह बयान एक दलित नेता का अपमान है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि, यदि भविष्य में इस तरह की बयानबाजी जारी रही तो कांग्रेस और उग्र आंदोलन करेगी। दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक चुनावी सभा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि, खड़गे द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उनके बयान से लगता है कि, वे भ्रमित हैं। इस टिप्पणी के बाद देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध जताना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि, खड़गे ने हाल ही में हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार से जुड़े नागरिकता और पासपोर्ट मामलों में जांच की मांग की थी। इसी के जवाब में सरमा ने यह बयान दिया था, जिसने अब राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। रायपुर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए केंद्र और असम सरकार के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर की। पार्टी नेताओं ने साफ कहा कि, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी और अपमानजनक भाषा लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।