मुंगेली। जिले के जरहागांव और छतौना के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के नए भवन को लेकर छिड़ा विवाद अब एक बड़े सियासी और सामाजिक गतिरोध में बदल गया है। विवाद की जड़ जिला पंचायत द्वारा ग्राम छतौना की गौठान भूमि पर अस्पताल निर्माण का प्रस्ताव पारित करना है, जिसके खिलाफ अब नगर पंचायत जरहागांव के लोग लामबंद हो गए हैं। जहां छतौना के ग्रामीण मुख्य मार्ग से जुड़ी जमीन और बेहतर पहुंच का हवाला दे रहे हैं, वहीं जरहागांव के निवासियों का तर्क है कि वर्तमान अस्पताल नगर में ही संचालित है, इसलिए नया भवन भी वहीं बनना चाहिए।

इस खींचतान के बीच मुंगेली की फिजाओं में ‘कमीशनखोरी’ की चर्चाएं सबसे ज्यादा गरम हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है कि, करोड़ों की लागत से बनने वाले इस अस्पताल के स्थल चयन के पीछे विकास से ज्यादा ‘हिस्सेदारी’ का खेल हो सकता है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही पर्दे के पीछे “किसे क्या मिलेगा” की रणनीति तैयार की जा रही है। हालांकि ये केवल जनचर्चाएं हैं, लेकिन इसने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।

आपको बता दें ,राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज है। कांग्रेस ने इस मामले में मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और स्थल चयन पर पुनर्विचार की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) गिरीश कुर्रे ने साफ कहा है कि, विभाग का लक्ष्य सुलभ स्वास्थ्य सेवा देना है और अंतिम फैसला स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नागरिकों की आपसी सहमति से ही लिया जाएगा। लगभग एक साल से अटके इस प्रोजेक्ट के कारण आसपास के 20 गांवों के हजारों लोग बेहतर इलाज के लिए तरस रहे हैं। अब देखना होगा कि, प्रशासन क्षेत्रवाद और व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर जनहित में क्या फैसला लेता है।
