दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि प्राइवेट स्कूलों की फीस को रेगुलेट करने वाला कानून इस साल से लागू नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा था कि वह प्राइवेट स्कूलों की फीस तय करने वाले कानून को अप्रैल 2026 तक लागू करने पर विचार करे, ताकि सभी पक्षों की चिंताओं और तैयारी को ध्यान में रखा जा सके। वहीं दिल्ली सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि प्राइवेट स्कूलों की फीस को रेगुलेट करने वाला कानून इस साल से लागू नहीं किया जाएगा। सरकार ने बताया कि यह कानून अकादमिक सेशन 2026-27 से लागू किया जाएगा, ताकि सभी स्कूल और अभिभावक आवश्यक तैयारी कर सकें। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सरकार से कहा था कि वह फीस रेगुलेशन कानून को अप्रैल 2026 तक लागू करने पर विचार करे, जिससे स्कूलों और अभिभावकों के हितों का संतुलन बना रहे। दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि कानून को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय और चर्चा की जाएगी, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
आपको बता दें की दिल्ली सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्राइवेट स्कूलों की फीस को रेगुलेट करने वाला कानून इस साल से लागू नहीं किया जाएगा और इसे अकादमिक सेशन 2026-27 से लागू किया जाएगा। यह फैसला उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस हफ्ते मंगलवार को रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को 2025-26 एकेडमिक साल के लिए इस कानून को लागू करने में देरी के संबंध में फैसला लेने के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पहले, 19 जनवरी को हुई सुनवाई में, दिल्ली सरकार से कहा था कि वह अपने कानून को अप्रैल 2026 तक टालने पर विचार करे, क्योंकि चल रहे एकेडमिक सेशन में कानून को लागू करना संभव नहीं होगा। सरकार ने कोर्ट को बताया कि फीस रेगुलेशन कानून लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों स्कूल, अभिभावक और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श और समन्वय किया जाएगा, ताकि कानून का प्रभाव पारदर्शी और निष्पक्ष रूप से सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का यह फैसला तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट प्राइवेट स्कूल एसोसिएशनों द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट, 2025 को चुनौती दी गई है। दरअसल, दिसंबर 2025 में जारी एक अलग सर्कुलर में सरकार ने 2025-26 के मौजूदा अकादमिक साल के लिए कानून को लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी थी। इस फैसले का प्राइवेट स्कूलों ने विरोध किया था।
