नई दिल्ली। भारतीय पैरा आर्मरेसलर श्रिमंत झा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराकर देश का मान बढ़ाया है। नॉर्वे के ईदफ्योर्ड में आयोजित ‘नॉर्वे पैरा आर्मरेसलिंग कप 2026’ में श्रिमंत ने अपनी ताकत और फौलादी इरादों का प्रदर्शन करते हुए पीआईयूएच -85 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया। फाइनल के रोमांचक मुकाबले में उन्होंने पोलैंड के दिग्गज खिलाड़ी मार्सिन चाप्लिकी को धूल चटाते हुए खिताबी जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद श्रिमंत ने अपना पदक भारत की महान गायिका आशा भोसले को समर्पित कर भावुक सम्मान दिया है।
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श्रिमंत की यह जीत जितनी शानदार है, उसका संघर्ष उतना ही चुनौतीपूर्ण रहा। फाइनल मुकाबले से पहले एयर फ्रांस की लापरवाही के चलते उनका लगेज गुम हो गया, जिसमें उनकी आधिकारिक ‘टीम इंडिया किट’ और जर्सी भी थी। बिना अपनी पहचान वाली जर्सी के मैदान में उतरना किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से कठिन होता है। श्रिमंत ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि, इंडिया किट उनके लिए सिर्फ कपड़ा नहीं बल्कि गर्व और पहचान है, जिसे न पहन पाने के कारण वे अंदर से अधूरा महसूस कर रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव को पीछे छोड़ते हुए पूरे दिल से मुकाबला किया और स्वर्ण पदक जीतकर ही दम लिया।
वर्तमान में विश्व रैंकिंग में तीसरे और एशिया के नंबर-1 पैरा आर्मरेसलर श्रिमंत झा अब तक भारत के लिए कुल 64 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम है, बल्कि उन तमाम बाधाओं पर विजय की कहानी है, जो एक एथलीट के रास्ते में आती हैं। बिना किट के स्वर्ण जीतने का यह कारनामा आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। श्रिमंत की इस बड़ी जीत के बाद देश भर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं।
