आज बैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कालाष्टमी का का संयोग बना है। आज भगवान भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी आती है, लेकिन वैशाख महीने की कालाष्टमी को थोड़ा ज्यादा खास माना जाता है. कहते हैं कि काल भैरव समय के स्वामी हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं. जो लोग सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं, उनके जीवन के संकट धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. आपको बता दें की इस दिन व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन उपवास रखे. काल भैरव की पूजा रात में करने का विशेष महत्व रहता है. पूजा के दौरान मूर्ति या चित्र स्थापित करें. सरसों का तेल, काले तिल, फूल, नारियल, लड्डू और मीठा पान अर्पित किया जाता है.
जाने कालाष्टमी के उपाय:
एक बात जो अक्सर लोग ध्यान रखते हैं. कालाष्टमी के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है. साथ ही भैरव चालीसा और मंत्रों का जाप भी किया जाता है. कालाष्टमी पर कुत्तों को खाना खिलाने की परंपरा भी है. कुत्ते को काल भैरव का वाहन माना गया है, इसलिए उसे भोजन कराने से पुण्य मिलता है. सभी तरह की बाधाएं कम होती हैं. इस दिन दानपुण्य का भी खास महत्व है. जरूरतमंदों की मदद करना शुभ माना जाता है. वहीं ज्योतिष के अनुसार यह व्रत शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है. जो लोग मानसिक तनाव या डर से परेशान रहते हैं. उनके लिए भी यह दिन खास माना जाता है. शमी के पेड़ में जल चढ़ाना, शमी का पौधा लगाना और काल भैरव के मंत्रों का जाप करना लाभकारी बताया गया है.
