आज शाख महीने की अमावस्या को बहुत अहम माना जाता है. इसे सतुवाई अमावस्या भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन सत्तू का दान करना शुभ माना जाता है. सत्तू (भुने चने, गेहूं, जौ से बना आटा) होता है. इस साल यह अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार मनाई जाएगी. इस दिन स्नान, तर्पण और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. पितरों को शांति मिलती है. इसलिए लोग इस दिन पिंडदान और तर्पण भी करते हैं.आपको बता दें की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदी में स्नान करके भगवान विष्णु, शनिदेव और लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने का खास महत्व है. ऐसा करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. कई लोग इस दिन व्रत रखकर भी पूजा-पाठ करते हैं. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाया जाता है. साथ ही ओम नमः शिवाय का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं. हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा पढ़ना भी लाभकारी माना जाता है. कुल मिलाकर, यह दिन अच्छे काम करने और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश देता है. वहीं सतुवाई अमावस्या पर जरूरतमंदों कोक दान-पुण्य करना चाहिए. आर्थिक मदद करना चाहिए. खासकर गर्मी के मौसम में पानी का दान बहुत पुण्य देता है. लोग जगह-जगह प्याऊ लगवाते हैं या मटके में ठंडा पानी रखवाते हैं. इसके अलावा गरीबों को भोजन कराना, सत्तू बांटना, जूते-चप्पल, कपड़े और छाता देना भी अच्छा माना जाता है. मौसमी फल जैसे आम, तरबूज और खरबूजा दान करना भी लाभकारी बताया गया है.कई लोग गौशाला में दान करते हैं और गायों को हरा चारा खिलाते हैं, जिसे शुभ माना जाता है.
जाने कब है सतुवाई अमावस्या, इस दिन दान का विशेष महत्व और जीवन में प्रभाव…
