नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दो महीने बाद पहली बार 700 अरब डॉलर के नीचे आ गया है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 20 मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का कुल भंडार घटकर 698.35 अरब डॉलर रह गया, जो एक हफ्ते पहले 709.76 अरब डॉलर था। फरवरी अंत में विदेशी मुद्रा भंडार 728.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इस दौरान गोल्ड रिजर्व का मूल्य 13.5 अरब डॉलर घटकर 117.2 अरब डॉलर रह गया। रेमंड समूह के पूर्व अध्यक्ष विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे और उनका निधन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ। उनके परिवार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की। समूह के वर्तमान अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गौतम सिंघानिया ने ‘एक्स’ पर निधन की जानकारी दी। रेमंड समूह के प्रवक्ता ने बताया कि विजयपत सिंघानिया का अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। विजयपत सिंघानिया को भारत के प्रतिष्ठित पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया था। वह एक उत्साही विमान चालक के रूप में भी जाने जाते थे। उन्होंने गर्म हवा के गुब्बारे में सर्वाधिक ऊंचाई हासिल करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने वर्ष 2000 तक दो दशकों तक रेमंड का अध्यक्ष पद संभाला। कंपनी की बागडोर गौतम को सौंपने के बाद उन्होंने अपनी पूरी 37 फीसदी हिस्सेदारी बेटे को हस्तांतरित कर दी थी।
विजयपत सिंघानिया और उनके बेटे गौतम के बीच कुछ वर्षों पहले कानूनी विवाद उत्पन्न हुए थे। हालांकि, बाद में दोनों ने इन मुद्दों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया था। विजयपत सिंघानिया ने रेमंड को एक प्रमुख ब्रांड बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी विरासत में व्यापारिक कौशल और साहसिक उपलब्धियां दोनों शामिल हैं। आरबीआई ने शुक्रवार को बैंकिंग प्रणाली में वीआरआर नीलामी के जरिये 65,322 करोड़ की नकदी डाली। वीआरआर यानी परिवर्तनीय रेपो दर बैंकों में नकदी डालने के लिए उपयोग की जाने वाली मौद्रिक नीति है। अग्रिम कर भुगतान और जीएसटी निकासी के कारण डाली गई राशि 75,000 करोड़ से कम रही। 26 मार्च तक बैंकों में 48,698.38 करोड़ रुपये की नकदी थी। पश्चिम एशिया युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति से करीब 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन की कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इस संकट को 1970 के दशक के तेल संकट और रूस-यूक्रेन गैस संकट से भी बड़ा बताया है। विश्लेषकों का अनुमान है कि युद्ध गहराया तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकती हैं। ईरान युद्ध को लेकर चल रही कूटनीतिक बातचीत के बीच शुक्रवार को तेल की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत मामूली गिरकर 107.97 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी घटकर 94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले कुछ हफ्तों में कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है।
निवेशकों को डर है कि संघर्ष जल्द खत्म नहीं होगा, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव जारी रह सकता है। उधर, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की समयसीमा 10 दिन बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी है और ईरान से होर्मुज को दोबारा खोलने की मांग की है। अमेरिका और ईरान ने अपने तेवर में नरमी के संकेत दिए हैं, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव अब भी बना हुआ है। मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप ने नई सेवाओं की पेशकश की। इसके तहत एपल आईफोन उपयोगकर्ता अब एक ही फोन पर दो खाते एक साथ चला सकेंगे। इसके अलावा इमेज एडिटिंग और संदेश लिखने के लिए नए टूल भी जोड़े गए हैं। इस अपडेट के बाद उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत एवं कामकाजी बातचीत के लिए दो अलग-अलग फोन रखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। देश के रियल एस्टेट सेक्टर में जनवरी से मार्च 2026 के दौरान हाउसिंग बिक्री में तिमाही आधार पर गिरावट देखने को मिली। एनरॉक के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के चलते बाजार पर दबाव बना रहा। इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में देश के टॉप-7 शहरों में कुल 1,01,675 घरों की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 9 फीसदी ज्यादा है। भारत में 2026 में गेहूं की पैदावार पिछले साल के मुकाबले बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पकती हुई फसल को नुकसान पहुंचने के कारण यह शुरुआती अनुमानों से कम रह सकती है।
सरकार ने इस साल गेहूं उत्पादन का अनुमान करीब 12 करोड़ टन होने का लगाया है, आटा मिल मालिकों के संगठन ने 11.5 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया है। इस साल किसानों ने 3.3 करोड़ हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की है, जो पिछले साल के 3.2 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा है। भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। यहां गेहूं की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में होती है और कटाई मार्च-अप्रैल में की जाती है। हाल के वर्षों में, फरवरी के आखिर में पड़ने वाली गर्मी के कारण पैदावार में कमी देखने को मिली है। 2025 में अनुकूल मौसम के चलते गेहूं उत्पादन में सुधार हुआ था, लेकिन इस साल फरवरी के आखिर में अचानक गर्मी बढ़ने से चिंताएं बढ़ गई हैं। हाल में हुई बारिश से गेहूं उत्पादक किसानों को कुछ राहत मिली है, पर देश के कुछ हिस्सों में हुई ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे पैदावार में कमी आने और फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की चिंताएं बढ़ गई हैं।
