वॉशिंगटन। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में शांति वार्ता होनी है। संभावना जताई जा रही है कि इस अमेरिका-ईरान के बीच इस शांति वार्ता से पश्चिम एशिया संकट का हल निकल सकता है। हालांकि, इसकी उम्मीदें कम ही हैं। ऐसा कहने की सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान। वहीं, ईरान भी अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं है। आपको बता दें की पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि अगर इस्लामाबाद में शांति वार्ता विफल होती है, तो अमेरिका ईरान पर अपने सबसे बेहतरीन हथियारों का इस्तेमाल करके एक बड़ा सैन्य हमला करने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में हालिया तैनातियों के बाद अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50000 के पार पहुंच गई है। वहां पहले से ही करीब 2500 मरीन और 2500 नौसैनिक मौजूद हैं। अमेरिकी युद्धपोतों की संख्या भी खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी है। वहीं, कई युद्धपोत पश्चिम एशिया की ओर रवाना भी हुए हैं। वहीं शांति वार्ता से पहले ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के नेतृत्व में एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा। वहीं, अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता से पहले गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि ईरान की पहले की शर्तें पूरी होने पर ही बातचीत आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है।
गालिबाफ ने यह भी कहा कि तेहरान की मांगों में लेबनान में युद्धविराम शामिल है। ईरान और मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने भी कहा कि यह अमेरिका के साथ युद्धविराम का हिस्सा होना चाहिए था। हालांकि, अमेरिका और इस्राइल ने इस बात से इनकार किया है। कहा जा सकता है कि ईरान की पूर्व-शर्तों पर अमेरिकी मुहर लगने से ही शांति वार्ता के सफल होने की उम्मीद है। जहां ईरान की कुछ प्रमुख शर्तें इस प्रकार है।
प्रतिबंध हटाना: अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को स्थायी रूप से हटाना।
क्षेत्रीय नियंत्रण: होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण जारी रहेगा।
यूरेनियम संवर्धन: ईरान को मिले यूरेनियम संवर्धन जारी रखने का अधिकार।
सेना की वापसी: क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की पूरी तरह वापसी।
हमला न करने की गारंटी: अमेरिका द्वारा ईरान पर भविष्य में कोई सैन्य हमला न करने का लिखित आश्वासन।
युद्ध से हुए नुकसान का हर्जाना: संघर्ष के कारण ईरान को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा।
यूएम और आईएईए का रुख: ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सभी प्रस्तावों को रद्द करना।
युद्ध की समाप्ति: लेबनान, इराक और यमन सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की पूर्ण समाप्ति।
अमेरिका की शर्तें –
30 दिनों का युद्धविराम।
ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करना।
भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का भरोसा।
संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को सौंपना।
ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे की आईएईए द्वारा पूर्ण निगरानी और देश के भीतर यूरेनियम संवर्धन पर रोक।
क्षेत्रीय प्रॉक्सी (हिजबुल्ला, हमास आदि) के लिए ईरान का समर्थन खत्म करना।
क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों को रोकना।
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना।
ईरान पर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को हटाना।
ईरान की मिसाइलों की संख्या और उनकी रेंज सीमित करने की मांग।
